Shri Vishnu Chalisa Lyrics in Hindi and English | PDF Download

जय श्री हरि! यदि आप गुरुवार के पावन अवसर पर भगवान विष्णु की आराधना के लिए श्री विष्णु चालीसा (Shri Vishnu Chalisa) के शुद्ध लिरिक्स और PDF खोज रहे हैं, तो यह ब्लॉग आपके लिए है।

हिन्दू धर्म में भगवान विष्णु को ‘पालनहार’ कहा जाता है। मान्यता है कि गुरुवार के दिन जो भी भक्त सच्चे मन से “विष्णु सुनिए विनय, सेवक की चितलाय” का पाठ करता है, उस पर लक्ष्मी-नारायण की विशेष कृपा बरसती है। विष्णु चालीसा का पाठ न केवल मानसिक शांति देता है, बल्कि घर में सुख, समृद्धि और धन-धान्य की वृद्धि करता है।

इस पोस्ट में हमने आपके लिए विष्णु चालीसा के लिरिक्स हिंदी (Hindi) और इंग्लिश (English) दोनों भाषाओं में उपलब्ध कराए हैं। साथ ही, नित्य उपासना के लिए एक High-Quality PDF भी दी गई है, जिसे आप मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं।

आइये, श्री हरि के चरणों में ध्यान लगाकर चालीसा का पाठ आरम्भ करें।

विष्णु चालीसा के लिरिक्स हिंदी में

दोहा
विष्णु सुनिए विनय सेवक की चितलाय ।
कीरत कुछ वर्णन करूं दीजै ज्ञान बताय ।।

॥ चौपाई ॥
नमो विष्णु भगवान खरारी, कष्ट नशावन अखिल बिहारी ।
प्रबल जगत में शक्ति तुम्हारी, त्रिभुवन फैल रही उजियारी ।।

सुन्दर रूप मनोहर सूरत, सरल स्वभाव मोहनी मूरत ।
तन पर पीताम्बर अति सोहत, बैजन्ती माला मन मोहत ।।

शंख चक्र कर गदा विराजे, देखत दैत्य असुर दल भाजे ।
सत्य धर्म मद लोभ न गाजे, काम क्रोध मद लोभ न छाजे ।।

सन्तभक्त सज्जन मनरंजन, दनुज असुर दुष्टन दल गंजन ।
सुख उपजाय कष्ट सब भंजन, दोष मिटाय करत जन सज्जन ।।

पाप काट भव सिन्धु उतारण, कष्ट नाशकर भक्त उबारण ।
करत अनेक रूप प्रभु धारण, केवल आप भक्ति के कारण ।।

धरणि धेनु बन तुमहिं पुकारा, तब तुम रूप राम का धारा ।
भार उतार असुर दल मारा, रावण आदिक को संहारा ।।

आप वाराह रूप बनाया, हिरण्याक्ष को मार गिराया ।
धर मत्स्य तन सिन्धु बनाया, चौदह रतनन को निकलाया।।

अमिलख असुरन द्वन्द मचाया, रूप मोहनी आप दिखाया ।
देवन को अमृत पान कराया, असुरन को छवि से बहलाया।।

कूर्म रूप धर सिन्धु मझाया, मन्द्राचल गिरि तुरत उठाया ।
शंकर का तुम फन्द छुड़ाया, भस्मासुर को रूप दिखाया ।।

वेदन को जब असुर डुबाया, कर प्रबन्ध उन्हें ढुढवाया ।
मोहित बनकर खलहि नचाया, उसही कर से भस्म कराया ।।

असुर जलन्धर अति बलदाई, शंकर से उन कीन्ह लड़ाई ।
हार पार शिव सकल बनाई, कीन सती से छल खल जाई।।

सुमिरन कीन तुम्हें शिवरानी, बतलाई सब विपत कहानी ।
तब तुम बने मुनीश्वर ज्ञानी, वृन्दा की सब सुरति भुलानी।।

देखत तीन दनुज शैतानी, वृन्दा आय तुम्हें लपटानी ।
हो स्पर्श धर्म क्षति मानी, हना असुर उर शिव शैतानी।।

तुमने ध्रुव प्रहलाद उबारे, हिरणाकुश आदिक खल मारे ।
गणिका और अजामिल तारे, बहुत भक्त भव सिन्धु उतारे।।

हरहु सकल संताप हमारे, कृपा करहु हरि सिरजन हारे ।
देखहुं मैं निज दरश तुम्हारे, दीन बन्धु भक्तन हितकारे।।

चाहता आपका सेवक दर्शन, करहु दया अपनी मधुसूदन ।
जानूं नहीं योग्य जब पूजन, होय यज्ञ स्तुति अनुमोदन ।।

शीलदया सन्तोष सुलक्षण, विदित नहीं व्रतबोध विलक्षण ।
करहुं आपका किस विधि पूजन, कुमति विलोक होत दुख भीषण ।।

करहुं प्रणाम कौन विधिसुमिरण, कौन भांति मैं करहु समर्पण ।
सुर मुनि करत सदा सेवकाई, हर्षित रहत परम गति पाई ।।

दीन दुखिन पर सदा सहाई, निज जन जान लेव अपनाई ।
पाप दोष संताप नशाओ, भव बन्धन से मुक्त कराओ।।

सुत सम्पति दे सुख उपजाओ, निज चरनन का दास बनाओ ।
निगम सदा ये विनय सुनावै, पढ़ै सुनै सो जन सुख पावै।।

॥ दोहा ॥
भक्त जनों के काज सब, पूरे करते नाथ ।
सेवक प्रभु से माँगे, दीजै अपने हाथ ॥

Shri Vishnu Chalisa Lyrics in English (Hinglish)

॥ Doha ॥

Vishnu suniye vinay sevak ki chit laay,
Keerat kuchh varnan karun, deeje gyaan bataay॥

॥ Chaupai ॥

Namo Vishnu Bhagwan kharaari,
Kasht nashaavan akhil bihaari।
Prabal jagat mein shakti tumhaari,
Tribhuvan phail rahi ujiyaari॥

Sundar roop manohar soorat,
Saral swabhaav mohni moorat।
Tan par peetaambar ati sohat,
Baijanti maala man mohat॥

Shankh chakra kar gada viraaje,
Dekhat daitya asur dal bhaaje।
Satya dharm mad lobh na gaaje,
Kaam krodh mad lobh na chhaaje॥

Sant bhakt sajjan man ranjan,
Danuj asur dushtan dal ganjan।
Sukh upjaay kasht sab bhanjan,
Dosh mitaay karat jan sajjan॥

Paap kaat bhav sindhu utaaran,
Kasht naashkar bhakt ubaaran।
Karat anek roop Prabhu dhaaran,
Keval aap bhakti ke kaaran॥

Dharni dhenu ban tumhi pukaara,
Tab tum roop Ram ka dhaara।
Bhaar utaar asur dal maara,
Raavan aadik ko sanhaara॥

Aap Varaah roop banaaya,
Hiranyaaksh ko maar giraaya।
Dhar Matsya tan sindhu banaaya,
Chaudah ratanan ko niklaaya॥

Amilakh asuran dvand machaaya,
Roop Mohini aap dikhaaya।
Devan ko amrit paan karaaya,
Asuran ko chhavi se bahlaaya॥

Koorm roop dhar sindhu majhaaya,
Mandrachal giri turat uthaaya।
Shankar ka tum phand chhudaaya,
Bhasmaasur ko roop dikhaaya॥

Vedan ko jab asur dubaaya,
Kar prabandh unhen dhoondhvaaya।
Mohit ban kar khalahi nachaaya,
Usi kar se bhasm karaaya॥

Asur Jalandhar ati baldaai,
Shankar se un keenh ladaai।
Haar paar Shiv sakal banaai,
Keen Sati se chhal khal jaai॥

Sumiran keen tumhen Shivrani,
Batlaai sab vipat kahaani।
Tab tum bane munishwar gyaani,
Vrinda ki sab surti bhulaani॥

Dekhat teen danuj shaitaani,
Vrinda aayi tumhen laptani।
Ho sparsh dharm kshati maani,
Hana asur ur Shiv shaitaani॥

Tumne Dhruv Prahlaad ubaare,
Hiranyakush aadik khal maare।
Ganika aur Ajaamil taare,
Bahut bhakt bhav sindhu utaare॥

Harahu sakal santaap hamaare,
Kripa karahu Hari srijan haare।
Dekhun main nij darash tumhaare,
Deen bandhu bhaktan hitkaare॥

Chaahata aapka sevak darshan,
Karahu daya apni Madhusudan।
Jaanu nahin yogya jab poojan,
Hoy yagya stuti anumodan॥

Sheel daya santosh sulakshan,
Vidit nahin vrat bodh vilakshan।
Karahun aapka kis vidhi poojan,
Kumati vilok hot dukh bheeshan॥

Karahun pranaam kaun vidhi sumiran,
Kaun bhaanti main karahun samarpan।
Sur muni karat sada sevakaai,
Harshit rahat param gati paai॥

Deen dukhin par sada sahaai,
Nij jan jaan lev apnaai।
Paap dosh santaap nashaao,
Bhav bandhan se mukt karaao॥

Sut sampatti de sukh upjaao,
Nij charanan ka daas banaao।
Nigam sada yeh vinay sunaavai,
Padhai sunai so jan sukh paavai॥

॥ Doha ॥

Bhakt jano ke kaaj sab, Poore karte Naath।
Sevak Prabhu se maange, Deejai apne haath॥

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श्री विष्णु चालीसा पढ़ने के चमत्कारिक लाभ

जगत के पालनहार भगवान विष्णु की महिमा अपरम्पार है। गुरुवार (बृहस्पतिवार) के दिन “विष्णु सुनिए विनय” का पाठ करने से भक्तों को विशेष फलों की प्राप्ति होती है:

  • सुख-समृद्धि और धन: भगवान विष्णु माँ लक्ष्मी के पति हैं। जो भक्त विष्णु चालीसा का पाठ करते हैं, उनके घर में दरिद्रता कभी नहीं आती और धन-धान्य के भंडार भरे रहते हैं।
  • पापों का नाश: विष्णु जी को ‘हरि’ कहा जाता है, जिसका अर्थ है ‘हरने वाला’। यह चालीसा मनुष्य के जाने-अनजाने में किए गए सभी पापों और कष्टों को हर लेती है।
  • शीघ्र विवाह के योग: जिन कुंवारे लड़के-लड़कियों के विवाह में बाधा आ रही हो, उन्हें गुरुवार को विष्णु चालीसा का पाठ अवश्य करना चाहिए। इससे गुरु ग्रह (Jupiter) मजबूत होता है और विवाह के योग बनते हैं।
  • पारिवारिक क्लेश से मुक्ति: यदि घर में बिना वजह झगड़े होते हों, तो सामूहिक रूप से विष्णु चालीसा पढ़ने से परिवार में प्रेम और शांति (Harmony) बढ़ती है।
  • बैकुंठ की प्राप्ति: मान्यता है कि जो अंत समय तक विष्णु भक्ति में लीन रहता है, उसे मृत्यु के पश्चात मोक्ष और बैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है।

विशेष उपाय: गुरुवार के दिन पीले वस्त्र पहनकर और भगवान को केले (Banana) या चने की दाल और गुड़ का भोग लगाकर चालीसा पढ़ने से मनोकामना शीघ्र पूर्ण होती है।

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