हर हर महादेव! भोलेनाथ के भक्तों के लिए “ॐ जय शिव ओमकारा” केवल एक आरती नहीं, बल्कि शिव-शक्ति और त्रिदेवों की स्तुति का महामंत्र है। चाहे सावन का महीना हो, महाशिवरात्रि हो, या सोमवार की पूजा, भगवान शिव की यह आरती गाए बिना पूजा पूर्ण नहीं मानी जाती।
इस Shiv Aarti Lyrics में भगवान शिव के पंचानन और दशानन रूप, उनके वाहन नंदी, और उनकी अर्धांगिनी माता पार्वती का बहुत सुंदर वर्णन किया गया है। मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से “स्वामी तीनों रूप बखानें” का उद्घोष करता है, शिव जी उसकी पुकार तुरंत सुन लेते हैं।
इंटरनेट पर कई जगह इस आरती के शब्दों में अंतर मिलता है। इसलिए, iLoveBhajan पर हम आपके लिए इस आरती के प्रामाणिक और शुद्ध लिरिक्स हिंदी (Hindi) और इंग्लिश (English) में लेकर आए हैं।
आइये, भस्म रमाने वाले कैलाशपति शिव का ध्यान करें और Shiv Aarti का पाठ शुरू करें।
Om Jai Shiv Omkara Lyrics in Hindi | शिवजी की आरती ‘ॐ जय शिव ओंकारा’
ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥ ओम जय शिव ओंकारा॥
एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे।
हंसासन गरूड़ासन वृषवाहन साजे॥ ओम जय शिव ओंकारा॥
दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे।
त्रिगुण रूप निरखत त्रिभुवन जन मोहे॥ ओम जय शिव ओंकारा॥
अक्षमाला वनमाला मुण्डमालाधारी।
त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी॥ ओम जय शिव ओंकारा॥
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघंबर अंगे।
सनकादिक गरुड़ादिक भूतादिक संगे॥ ओम जय शिव ओंकारा॥
कर के मध्य कमण्डल चक्र त्रिशूलधारी।
जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता॥ ओम जय शिव ओंकारा॥
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
प्रणवाक्षर के मध्ये ये तीनों एका॥ ओम जय शिव ओंकारा॥
पर्वत सोहैं पार्वती, शंकर कैलासा।
भांग धतूरे का भोजन, भस्मी में वासा॥ ओम जय शिव ओंकारा॥
जटा में गंग बहत है, गल मुण्डन माला।
शेष नाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला॥ ओम जय शिव ओंकारा॥
काशी में विराजे विश्वनाथ, नन्दी ब्रह्मचारी।
नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी॥ ओम जय शिव ओंकारा॥
त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोइ नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी, मनवान्छित फल पावे॥
ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥ ओम जय शिव ओंकारा॥
Om Jai Shiv Omkara Hinglish Shiv Aarti Lyrics
Om Jai Shiv Omkara, Swami Jai Shiv Omkara
Brahma, Vishnu, Sadashiv, Arddhangi Dhaara
Om Jai Shiv Omkara
Ekanan Chaturanan Panchanan Raaje
Hansasan Garudasan Vrishvahan Saaje
Om Jai Shiv Omkara
Do bhuj chaar chaturbhuj dasbhuj ati sohe
Trigun roop nirakhat tribhuvan jan mohe
Om Jai Shiv Omkara
Akshamaala vanmaala mundmaala dhaari
Tripuraari Kansari kar maala dhaari
Om Jai Shiv Omkara
Shwetaambar Peetaambar Baaghambar ange
Sanakaadik Garudaadik Bhootadik sange
Om Jai Shiv Omkara
Kar ke madhya Kamandal Chakra Trishuldhaari
Jagkarta Jagbharta Jagsanhaarkarta
Om Jai Shiv Omkara
Brahma Vishnu Sadashiv jaanat aviveka
Pranavakshar ke madhye ye teeno eka
Om Jai Shiv Omkara
Parvat sohain Parvati, Shankar Kailasa
Bhaang Dhature ka bhojan, bhasmi mein vaasa
Om Jai Shiv Omkara
Jata mein Ganga bahat hai, gal mundan maala
Shesh Naag liptaavat, odhat mrigchhala
Om Jai Shiv Omkara
Kashi mein viraaje Vishwanath, Nandi Brahmachari
Nit uth darshan paavat, mahima ati bhaari
Om Jai Shiv Omkara
Trigunswami ji ki aarti jo koi nar gaave
Kahat Shivanand Swami, manvaanchhit phal paave
Om Jai Shiv Omkara, Swami Jai Shiv Omkara
Brahma, Vishnu, Sadashiv, Arddhangi Dhaara
Om Jai Shiv Omkara
श्री शिव आरती पढ़ने के चमत्कारिक लाभ
भगवान शिव कल्याणकारी हैं। सोमवार और प्रदोष के समय ‘ओम जय शिव ओमकारा’ आरती गाने से न केवल शिव जी, बल्कि पूरे शिव परिवार का आशीर्वाद मिलता है। इसके प्रमुख लाभ इस प्रकार हैं:
- त्रिदेवों की कृपा: यह एक ऐसी अद्भुत आरती है जिसमें ब्रह्मा, विष्णु और सदाशिव तीनों का गुणगान किया गया है (“ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, अर्द्धांगी धारा”।)। इसे गाने से तीनों देवताओं का आशीर्वाद एक साथ प्राप्त होता है।
- मन की शांति और सकारात्मकता: शिव जी का ध्यान करने और यह आरती गाने से मन की बेचैनी दूर होती है और असीम शांति (Mental Peace) मिलती है। यह नकारात्मक विचारों को खत्म करती है।
- पापों का नाश: आरती की अंतिम पंक्तियों में कहा गया है- “कहत शिवानन्द स्वामी, मन वांछित फल पावे”। सच्चे मन से आरती करने से पुराने पाप धुल जाते हैं और भक्त का अंतरात्मा शुद्ध हो जाता है।
- गृह क्लेश से मुक्ति: भगवान शिव और शक्ति (पार्वती) का दांपत्य जीवन आदर्श माना जाता है। इस आरती को परिवार के साथ गाने से घर के झगड़े समाप्त होते हैं और आपसी प्रेम बढ़ता है।
- सभी मनोकामनाएं पूर्ण: जो भक्त नियम से भगवान शिव की आरती उतारते हैं, भोलेनाथ उनकी हर मनोकामना चाहे वह धन की हो, संतान की हो या मोक्ष की अवश्य पूरी करते हैं।
विशेष उपाय: शिव जी को सफेद फूल और भस्म बहुत प्रिय हैं। आरती से पहले शिवलिंग पर भस्म और जल चढ़ाने से पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है।
FAQ – भोलेनाथ की आरती लिखी हुई
ॐ जय शिव ओमकारा आरती किसकी है?
यह आरती भगवान शिव (भोलेनाथ, महादेव) की है। इसे भक्तजन शिव पूजा, सोमवार व्रत और महाशिवरात्रि के अवसर पर गाते हैं।
शिव आरती गाने से क्या लाभ मिलता है?
शिव आरती गाने से मन की शांति मिलती है, नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और जीवन में सुख-समृद्धि व सकारात्मकता आती है।
ॐ जय शिव ओमकारा आरती कब करनी चाहिए?
प्रातःकाल (सुबह) और संध्या (शाम) के समय भगवान शिव की आरती करना सबसे शुभ माना जाता है। सोमवार और महाशिवरात्रि के दिन इसका विशेष महत्व होता है।
क्या शिव आरती केवल मंदिर में ही की जाती है?
नहीं, शिव आरती आप घर पर भी कर सकते हैं। भक्तिभाव से भगवान शिव की मूर्ति या चित्र के सामने दीपक और धूप जलाकर आरती करना ही पर्याप्त है।
शिव आरती के दौरान कौन-से मंत्र बोलने चाहिए?
आरती से पहले और बाद में “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करना अत्यंत शुभ माना जाता है।


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