Shani Chalisa Lyrics in Hindi and English – श्री शनि चालीसा पाठ

॥ ॐ शं शनैश्चराय नमः ॥ 🕉️ सनातन धर्म में भगवान शनिदेव को ‘कर्मफलदाता’ और ‘दंडाधिकारी’ कहा जाता है। वे हमारे कर्मों का हिसाब रखते हैं और उसी के अनुसार फल देते हैं। कई लोग शनिदेव के नाम से भयभीत होते हैं, लेकिन सत्य यह है कि वे न्याय के देवता हैं।

जब जीवन में शनि की साढ़े साती (Sade Sati) या ढैया (Dhaiya) का प्रभाव चल रहा हो, बनते काम बिगड़ रहे हों, या अकारण संघर्ष बढ़ गया हो, तब “श्री शनि चालीसा” (Shani Chalisa) का पाठ अचूक उपाय माना जाता है। यह चालीसा केवल एक प्रार्थना नहीं, बल्कि शनिदेव की महिमा, उनकी शक्ति और उनकी न्यायप्रियता का गुणगान है, जो उन्हें प्रसन्न कर हमारे कष्टों को कम करती है।

आज के इस पोस्ट में, हम आपके लिए श्री शनि चालीसा के शुद्ध लिरिक्स हिंदी और अंग्रेजी में लेकर आए हैं। साथ ही जानेंगे कि इसका पाठ करने से क्या अद्भुत लाभ मिलते हैं।

विवरण (Details)जानकारी (Information)
पाठ का नामश्री शनि चालीसा (Shri Shani Chalisa)
समर्पितभगवान शनिदेव (Lord Shani Dev)
सर्वोत्तम दिनशनिवार (Saturday)
मुख्य लाभसाढ़े साती और ढैया के प्रकोप से राहत
अन्य नामरवि तनय, छाया नन्दन, कोणस्थ, मंद
रचयितासंत श्री रामदास जी (पारंपरिक मान्यता अनुसार)

Shani Chalisa Lyrics in Hindi

॥दोहा॥
जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल करण कृपाल।
दीनन के दुख दूर करि, कीजै नाथ निहाल॥
जय जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनहु विनय महाराज।
करहु कृपा हे रवि तनय, राखहु जन की लाज॥

जयति जयति शनिदेव दयाला।
करत सदा भक्तन प्रतिपाला॥

चारि भुजा, तनु श्याम विराजै।
माथे रतन मुकुट छबि छाजै॥

परम विशाल मनोहर भाला।
टेढ़ी दृष्टि भृकुटि विकराला॥

कुण्डल श्रवण चमाचम चमके।
हिय माल मुक्तन मणि दमके॥

कर में गदा त्रिशूल कुठारा।
पल बिच करैं अरिहिं संहारा॥

पिंगल, कृष्णो, छाया नन्दन।
यम, कोणस्थ, रौद्र, दुखभंजन॥

सौरी, मन्द, शनी, दश नामा।
भानु पुत्र पूजहिं सब कामा॥

जा पर प्रभु प्रसन्न ह्वैं जाहीं।
रंकहुँ राव करैं क्षण माहीं॥

पर्वतहू तृण होई निहारत।
तृणहू को पर्वत करि डारत॥

राज मिलत बन रामहिं दीन्हयो।
कैकेइहुँ की मति हरि लीन्हयो॥

बनहूँ में मृग कपट दिखाई।
मातु जानकी गई चुराई॥

लखनहिं शक्ति विकल करिडारा।
मचिगा दल में हाहाकारा॥

रावण की गति-मति बौराई।
रामचन्द्र सों बैर बढ़ाई॥

दियो कीट करि कंचन लंका।
बजि बजरंग बीर की डंका॥

नृप विक्रम पर तुहि पगु धारा।
चित्र मयूर निगलि गै हारा॥

हार नौलखा लाग्यो चोरी।
हाथ पैर डरवायो तोरी॥

भारी दशा निकृष्ट दिखायो।
तेलिहिं घर कोल्हू चलवायो॥

विनय राग दीपक महं कीन्हयों।
तब प्रसन्न प्रभु ह्वै सुख दीन्हयों॥

हरिश्चन्द्र नृप नारि बिकानी।
आपहुं भरे डोम घर पानी॥

तैसे नल पर दशा सिरानी।
भूंजी-मीन कूद गई पानी॥

श्री शंकरहिं गह्यो जब जाई।
पारवती को सती कराई॥

तनिक विलोकत ही करि रीसा।
नभ उड़ि गयो गौरिसुत सीसा॥

पाण्डव पर भै दशा तुम्हारी।
बची द्रौपदी होति उघारी॥

कौरव के भी गति मति मारयो।
युद्ध महाभारत करि डारयो॥

रवि कहँ मुख महँ धरि तत्काला।
लेकर कूदि परयो पाताला॥

शेष देव-लखि विनती लाई।
रवि को मुख ते दियो छुड़ाई॥

वाहन प्रभु के सात सुजाना।
जग दिग्गज गर्दभ मृग स्वाना॥

जम्बुक सिंह आदि नख धारी।
सो फल ज्योतिष कहत पुकारी॥

गज वाहन लक्ष्मी गृह आवैं।
हय ते सुख सम्पति उपजावैं॥

गर्दभ हानि करै बहु काजा।
सिंह सिद्धकर राज समाजा॥

जम्बुक बुद्धि नष्ट कर डारै।
मृग दे कष्ट प्राण संहारै॥

जब आवहिं प्रभु स्वान सवारी।
चोरी आदि होय डर भारी॥

तैसहि चारि चरण यह नामा।
स्वर्ण लौह चाँदी अरु तामा॥

लौह चरण पर जब प्रभु आवैं।
धन जन सम्पत्ति नष्ट करावैं॥

समता ताम्र रजत शुभकारी।
स्वर्ण सर्व सुख मंगल भारी॥

जो यह शनि चरित्र नित गावै।
कबहुं न दशा निकृष्ट सतावै॥

अद्भुत नाथ दिखावैं लीला।
करैं शत्रु के नशि बलि ढीला॥

जो पण्डित सुयोग्य बुलवाई।
विधिवत शनि ग्रह शांति कराई॥

पीपल जल शनि दिवस चढ़ावत।
दीप दान दै बहु सुख पावत॥

कहत राम सुन्दर प्रभु दासा।
शनि सुमिरत सुख होत प्रकाशा॥

॥दोहा॥
पाठ शनिश्चर देव को, की हों भक्त तैयार।
करत पाठ चालीस दिन, हो भवसागर पार॥

Shani Chalisa Lyrics in English

Doha
Jai Ganesh Girija suvan, mangal karan kripal.
Deenan ke dukh door kari, keejai naath nihaal॥

Jai jai Shri Shanidev Prabhu, sunahu vinay Maharaj.
Karahu kripa he Ravi tanay, raakhahu jan ki laaj॥

Jayati jayati Shanidev dayala.
Karat sada bhaktan pratipaala॥

Chaari bhuja, tanu shyaam viraajai.
Maathe ratan mukut chhabi chhaajai॥

Param Vishaal Manohar Bhaala.
Tedhi drishti bhrikuti vikaraala॥

Kundal Shravan Chamaacham Chamke.
Hiya maal muktan mani damke॥

Kar mein gada trishool kuthaara.
Pal bich karain arihin sanhaara॥

Pingal, Krishno, Chhaaya Nandan.
Yam, Konasth, Raudra, dukh-bhanjan॥

Sauri, Mand, Shani, dash naama.
Bhanu putra poojahin sab kaama॥

Ja par Prabhu prasann hvai jaahin.
Rankahun raav karain kshan maahin॥

Parvatahu trin hoi nihaarat.
Trinahu ko parvat kari daarat॥

Raaj milat ban Raamhin deenhyo.
Kaikeyihoon ki mati hari leenhyo॥

Banhoon mein mrig kapat dikhaai.
Maatu Janki gayi churaai॥

Lakhanhin shakti vikal kari daara.
Machiga dal mein haahaakaara॥

Raavan ki gati-mati bauraai.
Ramchandra son bair badhaai॥

Diyo keet kari kanchan Lanka.
Baji Bajrang veer ki danka॥

Nrip Vikram par tuhi pag dhaara.
Chitra Mayur nigali gai haara॥

Haar naulakha laagyo chori.
Haath pair darvaayo tori॥

Bhaari dasha nikrisht dikhaayo.
Telihin ghar kolhoo chalvaayo॥

Vinay raag Deepak mein keenhyon.
Tab prasann Prabhu hvai sukh deenhyon॥

Harishchandra nrip naari bikaani.
Aaphun bhare Dom ghar paani॥

Taise Nal par dasha siraani.
Bhoonji-meen kood gai paani॥

Shri Shankarhin gahyo jab jaai.
Parvati ko sati karaai॥

Tanik vilokat hi kari reesa.
Nabh udi gayo Gaurisut seesa॥

Pandav par bhai dasha tumhaari.
Bachi Draupadi hoti ughaari॥

Kaurav ke bhi gati mati maaryo.
Yuddh Mahabharat kari daaryo॥

Ravi kahen mukh mein dhari tatkaala.
Lekar koodi paryo paataala॥

Shesh Dev-lakhi vinati laai.
Ravi ko mukh te diyo chhudaai॥

Vaahan Prabhu ke saat sujaana.
Jag diggaj gardabh mrig svaana॥

Jambuk sinh aadi nakh dhaari.
So phal jyotish kahat pukaari॥

Gaj vaahan Lakshmi grih aavai.
Hay te sukh sampatti upjaavai॥

Gardabh haani karai bahu kaaja.
Sinh siddhkar raaj samaaja॥

Jambuk buddhi nasht kar daarai.
Mrig de kasht praan sanhaarai॥

Jab aavahin Prabhu svaan savaari.
Chori aadi hoy dar bhaari॥

Taise hi chaar charan yah naama.
Svarn, lauh, chaandi aru taama॥

Lauh charan par jab Prabhu aavain.
Dhan jan sampatti nasht karaavain॥

Samta taamra rajat shubhakaari.
Svarn sarv sukh mangal bhaari॥

Jo yah Shani charitra nit gaavai.
Kabahun na dasha nikrisht sataavai॥

Adbhut naath dikhaavain leela.
Karain shatru ke nash bali dheela॥

Jo pandit suyogya bulvaai.
Vidhivat Shani grah shaanti karaai॥

Peepal jal Shani divas chadhaavat.
Deep daan dai bahu sukh paavat॥

Kahat Ram Sundar Prabhu daasa.
Shani sumirat sukh hot prakaasha॥

Doha
Paath Shanichar Dev ko, ki hon bhakt taiyaar.
Karat paath chaalis din, ho bhavsaagar paar॥

शनि चालीसा के लाभ

शनि चालीसा में ही इसके लाभों का वर्णन किया गया है—“जो यह शनि चरित्र नित गावै, कबहुं न दशा निकृष्ट सतावै।”

  1. साढ़े साती और ढैया में राहत: यह पाठ शनि के वक्र दृष्टि के प्रभाव को शांत करता है और संघर्षों से लड़ने की शक्ति देता है।
  2. शत्रु बाधा से मुक्ति: “करैं शत्रु के नशि बलि ढीला”—यह पाठ शत्रुओं के बल को कमजोर करता है और आपकी रक्षा करता है।
  3. कर्मों का सुधार: शनिदेव न्याय के देवता हैं। यह पाठ हमें सत्कर्म करने की प्रेरणा देता है, जिससे हमारे बुरे कर्मों का प्रभाव कम होता है।
  4. मानसिक शांति: जीवन में चल रही उथल-पुथल के बीच यह पाठ मन को धैर्य और शांति प्रदान करता है।

पाठ की सरल विधि

  • दिन: शनिवार का दिन सर्वोत्तम है, विशेषकर संध्या काल (सूर्यास्त के बाद)।
  • शुद्धता: स्नान करके साफ वस्त्र पहनें (नीले या काले वस्त्रों को प्राथमिकता दी जा सकती है)।
  • स्थान: घर के मंदिर में या किसी पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाकर यह पाठ करें।
  • दीपक: सरसों के तेल (Mustard Oil) का दीपक जलाना बहुत शुभ माना जाता है।
  • भाव: सबसे महत्वपूर्ण है कि पाठ करते समय मन में भय न रखें, बल्कि श्रद्धा और अपने कर्मों को सुधारने का संकल्प रखें।

Conclusion (निष्कर्ष)

श्री शनि चालीसा हमें सिखाती है कि जीवन में सुख और दुख हमारे कर्मों का ही परिणाम हैं। शनिदेव हमें दंड देकर सुधारते हैं। जब भी जीवन कठिन लगे, तो न्यायधीश शनिदेव की शरण में जाएं, वे अत्यंत कृपालु भी हैं और अपने भक्तों की लाज अवश्य रखते हैं।

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