साथी हमारा कौन बनेगा तुम ना सुनोगे तो कौन सुनेगा भजन हिंदी लिरिक्स

जय श्री श्याम! 🙏 जब जीवन में मुसीबतें (Troubles) इतनी बढ़ जाएं कि “पानी सर से ऊपर” चला जाए, और कोई अपना साथ न दे, तब एक सच्चे भक्त की जुबां पर बस यही पुकार होती है “साथी हमारा कौन बनेगा, तुम ना सुनोगे तो कौन सुनेगा।”

यह केवल एक गीत नहीं, बल्कि एक भावपूर्ण प्रार्थना है। इस Saathi hamara kaun banega Bhajan में भक्त अपने ईश्वर से शिकायत भी करता है और विनती भी। जहाँ दुनिया सिर्फ़ धर्मियों को अपनाती है, वहीं भक्त बाबा श्याम को याद दिलाता है कि “आज पापी आया है” और उसे तारना ही प्रभु का असली काम है।

लेखक ‘संजू’ द्वारा रचित यह भजन हमें सिखाता है कि जब हम अपना सब कुछ यहाँ तक कि अपने ‘पाप की गठरी’ भी—प्रभु के चरणों में सौंप देते हैं, तो Kalyan निश्चित है।

आइए, सच्चे मन से इस Devotional Song को गुनगुनाएं और बाबा को अपना साथी बनाएं।

साथी हमारा कौन बनेगा तुम ना सुनोगे तो कौन सुनेगा हिंदी लिरिक्स

साथी हमारा कौन बनेगा,
तुम ना सुनोगे तो कौन सुनेगा।
तुम ना सुनोगे, कौन सुनेगा॥

आ गया दर पे तेरे, सुनवाई हो जाए,
ज़िंदगी से दुखों की, विदाई हो जाए।
एक नज़र कृपा की डालो, मानूँगा एहसान॥
संकट हमारा कैसे टलेगा,
तुम ना सुनोगे तो कौन सुनेगा॥

पानी है सर से ऊपर, मुसीबत अड़ गई है,
आज हमको तुम्हारी, ज़रूरत पड़ गई है।
अपने हाथ से हाथ पकड़ लो, मानूँगा एहसान॥
साथ हमारे कौन चलेगा,
तुम ना सुनोगे तो कौन सुनेगा॥

तुम्हारे दर पे शायद, हमेशा धर्मी आते,
आज पापी आया है, श्याम काहे घबराते।
हमने सुना है तेरी नज़र में, सब हैं एक समान॥
इसका पता तो आज चलेगा,
तुम ना सुनोगे तो कौन सुनेगा॥

वो तेरे भक्त होंगे, जिन्हें है तुमने तारा,
बता ए मुरलीवाले, कौन सा तीर मारा।
भक्त तुम्हारे भक्ति करते, लेते रहते नाम॥
काम तो उनका करना पड़ेगा,
तुम ना सुनोगे तो कौन सुनेगा॥

पाप की गठड़ी सर पर, लाद कर मैं लाया,
बोझ कुछ हल्का कर दे, उठाने ना पाया।
फ़र्ज़ की राह बता संजू, हो जाए कल्याण॥
इसमें तुम्हारा कुछ ना घटेगा,
तुम ना सुनोगे तो कौन सुनेगा॥

साथी हमारा कौन बनेगा,
तुम ना सुनोगे तो कौन सुनेगा।
तुम ना सुनोगे, कौन सुनेगा॥

Saathi hamara kaun banega Lyrics in English

Saathi hamara kaun banega,
Tum na sunoge to kaun sunega.
Tum na sunoge, kaun sunega॥

Aa gaya dar pe tere, sunwaai ho jaaye,
Zindagi se dukhon ki, vidaai ho jaaye.
Ek nazar kripa ki daalo, maanunga ehsaan॥
Sankat hamara kaise talega,
Tum na sunoge to kaun sunega॥

Paani hai sar se upar, museebat ad gayi hai,
Aaj humko tumhari, zaroorat pad gayi hai.
Apne haath se haath pakad lo, maanunga ehsaan॥
Saath hamare kaun chalega,
Tum na sunoge to kaun sunega॥

Tumhare dar pe shaayad, hamesha dharmi aate,
Aaj paapi aaya hai, Shyam kaahe ghabraate.
Humne suna hai teri nazar mein, sab hain ek samaan॥
Iska pata to aaj chalega,
Tum na sunoge to kaun sunega॥

Wo tere bhakt honge, jinhein hai tumne taara,
Bata ae Murliwale, kaun sa teer maara.
Bhakt tumhare bhakti karte, lete rehte naam॥
Kaam to unka karna padega,
Tum na sunoge to kaun sunega॥

Paap ki gathri sar par, laad kar main laaya,
Bojh kuch halka kar de, uthaane na paaya.
Farz ki raah bata Sanju, ho jaaye kalyaan॥
Ismein tumhara kuch na ghatega,
Tum na sunoge to kaun sunega॥

Saathi hamara kaun banega,
Tum na sunoge to kaun sunega.
Tum na sunoge, kaun sunega॥

सन्दर्भ (Context)

“साथी हमारा कौन बनेगा” भजन केवल एक प्रार्थना नहीं, बल्कि एक भक्त का अपने आराध्य (खाटू श्याम जी) के साथ किया गया एक हृदयस्पर्शी संवाद है। यह भजन उस परिस्थिति का चित्रण करता है जब मनुष्य के जीवन में विपत्तियों का “पानी सिर से ऊपर” चला जाता है। जब संसार के सभी रिश्ते-नाते और सहारे काम नहीं आते, तब एक हताश व्यक्ति ईश्वर के द्वार पर आकर खड़ा होता है। इस भजन की विशेष बात यह है कि इसमें भक्त गिड़गिड़ा नहीं रहा, बल्कि बड़े अधिकार और अपनेपन के साथ भगवान को उलाहना (शिकायत) दे रहा है कि “अगर आप मेरा साथ नहीं देंगे, तो फिर कौन देगा?”

भावार्थ (Meaning)

भजन के रचयिता (संजू) ने एक भक्त की व्याकुलता को बहुत ही सुंदर तर्कों के साथ प्रस्तुत किया है:

  • अकेलेपन और भरोसे की पुकार: भक्त कहता है कि हे प्रभु! इस दुनिया में मेरा सच्चा साथी कौन है? अगर आप ही मेरी पुकार अनसुनी कर देंगे, तो मैं अपनी व्यथा किसे सुनाऊँगा? मैं आपकी शरण में इसीलिए आया हूँ ताकि मेरे जीवन से दुखों की हमेशा के लिए विदाई हो जाए।
  • संकट की पराकाष्ठा: भक्त स्थिति की गंभीरता बताते हुए कहता है, “पानी है सर से ऊपर, मुसीबत अड़ गयी है।” यानी, अब दुख सहने की सीमा समाप्त हो चुकी है। आज मुझे सिर्फ़ आपके आशीर्वाद की नहीं, बल्कि आपके साथ की जरूरत है। आप स्वयं मेरा हाथ थाम लीजिए, मैं आपका यह उपकार जीवन भर मानूंगा।
  • पापी होने का स्वीकार (सबसे भावुक अंश): आमतौर पर भक्त अपनी अच्छाइयां बताते हैं, लेकिन यहाँ भक्त अपनी कमियां स्वीकार करता है। वह कहता है— “तुम्हारे दर पे शायद, हमेशा धर्मी आते, आज पापी आया है…” भाव: हे श्याम! अच्छे और पुण्य करने वाले लोगों को तो हर कोई अपनाता है, लेकिन आपकी महानता तो तब सिद्ध होगी जब आप मुझ जैसे पापी को अपनाएंगे। मैंने सुना है कि आपकी नज़र में कोई छोटा-बड़ा नहीं, सब एक समान हैं।
  • प्रभु को प्रेम भरी चुनौती: भक्त बड़े अधिकार से प्रभु को चुनौती देता है “वो तेरे भक्त होंगे जिन्हें है तुमने तारा, बता ए मुरलीवाले कौन सा तीर मारा।” भाव: जो दिन-रात आपकी माला जपते हैं, अगर आपने उनका उद्धार कर दिया तो इसमें कौन सी बड़ी बात है? वह तो उनका अधिकार था। आपकी दयालुता का असली प्रमाण तो तब मिलेगा जब आप मुझ जैसे व्यक्ति का कल्याण करेंगे जिसने शायद कभी भक्ति नहीं की।
  • आत्मसमर्पण: अंत में, भक्त अपने पापों के बोझ को स्वीकार करता है और कहता है कि यह “पाप की गठरी” अब उससे उठाई नहीं जा रही। वह प्रभु से विनती करता है कि वे ही इस बोझ को हल्का करें और उसे सही राह (फर्ज़ की राह) दिखाएं, ताकि उसका कल्याण हो सके।

निष्कर्ष

यह भजन हमें सिखाता है कि ईश्वर के सामने हमें अपनी चालाकी नहीं, बल्कि अपनी सच्चाई रखनी चाहिए। जब हम अपनी कमियों और पापों को स्वीकार कर पूर्ण रूप से समर्पित हो जाते हैं, तो परमात्मा हमारा साथी अवश्य बनते हैं।

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