राधिका गोरी से ब्रिज की छोरी से मैया करादे मेरो ब्याह भजन लिरिक्स

राधे-राधे! 🙏 क्या आप कान्हा की उस बाल-लीला का आनंद लेना चाहते हैं, जहाँ वो अपनी मैया यशोदा से राधा जी से विवाह करने की ज़िद करते हैं? “राधिका गोरी से, ब्रिज की छोरी से, मैया करादे मेरो ब्याह” भजन इसी मीठी तकरार और प्रेम का प्रतीक है।

यह भजन सिर्फ़ एक गीत नहीं, बल्कि श्री कृष्ण और माता यशोदा के बीच का एक अत्यंत सुंदर संवाद (Dialogue) है। इसमें नन्हे कन्हैया अपनी सांवली सूरत और राधा जी की गोरी सूरत का तुलनात्मक वर्णन करते हुए, मैया के सामने अपनी बात रखते हैं। यह भजन हर कृष्ण भक्त के हृदय के बेहद करीब है और अक्सर सत्संग, जागरण व झांकियों में गाया जाता है।

यदि आप अपनी भजन मंडली में या घर के मंदिर में इस भजन को गाना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए लिरिक्स आपके लिए एकदम सही हैं। आइए, ब्रज की इस रसमय लीला में डूब जाएं।

Radhika Gori Se Brij Ki Chhori Se Lyrics in Hindi

राधिका गोरी से, ब्रिज की छोरी से,
मैया करा दे मेरो ब्याह,
उम्र तेरी छोटी है, नजर तेरी खोटी है,
कैसे करा दूँ तेरो ब्याह ।

जो नहीं ब्याह कराए, तेरी गैया नहीं चराऊँ,
आज के बाद मेरी मैया, तेरी देहली पर ना आऊँ,
आएगा रे मज़ा, रे मज़ा, अब जीत-हार का,

राधिका गोरी से, ब्रिज की छोरी से,
मैया करा दे मेरो ब्याह ।

चंदन की चौकी पर, मैया तुझको बिठाऊँ,
अपनी राधा से मैं, चरण तेरे दबवाऊँ,
भोजन मैं बनवाऊँगा, बनवाऊँगा, छप्पन प्रकार के,

राधिका गोरी से, ब्रिज की छोरी से,
मैया करा दे मेरो ब्याह ।

छोटी सी दुल्हनिया, जब अंगना में डोलेगी,
तेरे सामने मैया, वो घूँघट ना खोलेगी,
दाऊ से जा कहो, जा कहो, बैठेंगे द्वार पे,

राधिका गोरी से, ब्रिज की छोरी से,
मैया करा दे मेरो ब्याह ।

सुन बातें कान्हा की, मैया बैठी मुस्काए,
लेके बलैयाँ मैया, हिवड़े से अपने लगाए,
नज़र कहीं लग जाए, ना लग जाए, ना मेरे लाल को,

राधिका गोरी से, ब्रिज की छोरी से,
मैया करा दे मेरो ब्याह ।

Radhika Gori Se Brij Ki Chhori Se Lyrics in English

Radhika gori se, Brij ki chhori se,
Maiya kara de mero byaah,
Umr teri chhoti hai, nazar teri khoti hai,
Kaise kara doon tero byaah.

Jo nahin byaah karaaye, teri gaiya nahin charaun,
Aaj ke baad meri Maiya, teri dehri par na aaun,
Aayega re maza, re maza, ab jeet-haar ka.

Radhika gori se, Brij ki chhori se,
Maiya kara de mero byaah.

Chandan ki chauki par, Maiya tujhko bithaun,
Apni Radha se main, charan tere dabwaun,
Bhojan main banwaunga, banwaunga, chhappan prakaar ke.

Radhika gori se, Brij ki chhori se,
Maiya kara de mero byaah.

Chhoti si dulhaniya, jab angna mein dolegi,
Tere saamne Maiya, wo ghoonghat na kholegi,
Dau se ja kaho, ja kaho, baithenge dwaar pe.

Radhika gori se, Brij ki chhori se,
Maiya kara de mero byaah.

Sun baatein Kanha ki, Maiya baithi muskaaye,
Leke balaiya Maiya, hivde se apne lagaaye,
Nazar kahin lag jaaye, na lag jaaye, na mere laal ko.

Radhika gori se, Brij ki chhori se,
Maiya kara de mero byaah.

भजन का भाव: ‘सांवले’ कान्हा और ‘गोरी’ राधा का संवाद

इस भजन का मुख्य आकर्षण भगवान श्री कृष्ण और मैया यशोदा के बीच का तर्क-वितर्क है। कान्हा अपनी मैया से शिकायत करते हैं कि रंग-रूप अलग होने के बावजूद उनका विवाह राधा जी से क्यों नहीं हो सकता।

नीचे दी गई तालिका में देखें कि भजन में कान्हा ने अपना और राधा जी का वर्णन कैसे किया है:

विषय (Aspect)राधा जी का वर्णनकान्हा का वर्णन
रंग-रूप (Complexion)राधिका गोरी (अत्यंत सुंदर और गोरा रंग)मैं तो हूँ काला (सांवला सलोना रूप)
निवासी (Origin)ब्रिज की छोरी (ब्रज धाम की लाडली)नन्द का लाला (नन्द बाबा के पुत्र)
कान्हा की शिकायत (Complaint)“वो तो है गोरी…”“मोहे क्यों बनायो काला…” (मुझे काला क्यों बनाया?)
परिणाम (Outcome)मैया यशोदा उनकी सुंदरता पर मोहित हैं।कान्हा अपनी बातों और जादू से मैया को मना लेते हैं।

भजन का भावार्थ

यह भजन भगवान श्री कृष्ण की बाल लीलाओं का एक अद्भुत उदाहरण है। इसमें वात्सल्य रस (माँ और पुत्र का प्रेम) और श्रृंगार रस (राधा-कृष्ण का प्रेम) का सुंदर संगम देखने को मिलता है।

  • बाल-हठ (Childhood Stubbornness): नन्हे कान्हा अपनी मैया यशोदा से ज़िद कर रहे हैं कि उनका विवाह राधा जी से करा दिया जाए। वे कहते हैं, “राधिका गोरी से, ब्रिज की छोरी से, मैया करादे मेरो ब्याह।”
  • शिकायत और तर्क (Complaints & Logic): कान्हा अपनी तुलना राधा जी से करते हुए कहते हैं कि राधा गोरी हैं और वे काले (सांवले) हैं। वे मैया को धमकी भी देते हैं कि अगर विवाह नहीं कराया, तो वे गैया चराने नहीं जाएंगे और चौखट पर भी नहीं आएंगे।
  • भविष्य के वादे (Promises): अपनी मैया को मनाने के लिए कान्हा लालच देते हैं कि बहू (राधा) आने पर वे दोनों मिलकर मैया की सेवा करेंगे “चंदन की चौकी पर मैया तुझको बैठाऊं, अपनी राधा से मैं चरण तेरे दबवाऊं।”
  • मैया का उत्तर (Mother’s Reply): यशोदा मैया उन्हें टालने के लिए कहती हैं कि अभी उनकी उम्र बहुत छोटी है और उनकी नज़र खोंटी (नटखट) है, इसलिए अभी विवाह नहीं हो सकता।

निष्कर्ष

“राधिका गोरी से ब्रिज की छोरी से” भजन केवल एक गीत नहीं, बल्कि भक्ति और प्रेम का एक संवाद है।

इस भजन का निष्कर्ष यह है कि भगवान श्री कृष्ण, जो जगत के पालनहार हैं, अपनी मैया के सामने एक साधारण बालक बनकर प्रेम और हठ का नाटक करते हैं। यह भक्तों को यह संदेश देता है कि ईश्वर प्रेम के भूखे हैं।

भजन के अंत में, कान्हा की भोली बातें सुनकर मैया यशोदा का हृदय पिघल जाता है और वे मुस्कुराकर अपने लल्ला को गले लगा लेती हैं। यह भजन हमें राधा-कृष्ण के अटूट प्रेम और माँ यशोदा की ममता का एहसास कराता है।

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