Radha Rani Ki Aarti Lyrics – राधारानी तेरी आरती गाऊँ

जय श्री राधे! 🙏 ब्रज मंडल में एक कहावत बहुत प्रसिद्ध है “मुक्ति कहे गोपाल से, मेरी मुक्ति बताय? ब्रज रज उड़ मस्तक लगे, तो मुक्ति मुक्त हो जाय।” और इस ब्रज की महारानी स्वयं श्री राधा रानी हैं।

भगवान श्री कृष्ण को प्रसन्न करने का सबसे सरल मार्ग ‘राधा’ नाम ही है। “राधारानी तेरी आरती गाऊँ, ओ वरदाने तेरी आरती गाऊँ” आरती केवल शब्दों का गायन नहीं, बल्कि ‘लाड़ली जू’ (Ladli Ju) के चरणों में हमारा प्रेम भरा निवेदन है।

चाहे राधाष्टमी (Radhashtami) का पावन पर्व हो, बरसाना (Barsana) की यात्रा हो, या नित्य पूजा-किशोरी जी की यह आरती भक्तों के मन को अपार शांति देती है।

इस पोस्ट में आपके लिए क्या खास है? अक्सर इंटरनेट पर आरती के शब्दों में त्रुटियां मिलती हैं। यहाँ हम ब्रज के संतों द्वारा प्रमाणित शुद्ध पाठ लेकर आए हैं:

  • Radha Rani Ki Aarti Lyrics in Hindi: शुद्ध और त्रुटिहीन हिंदी बोल।
  • English Script: हिंग्लिश में, ताकि आप आसानी से गा सकें।
  • आरती का भाव: जानें कि क्यों राधा जी को “प्यारे मोहन की प्यारी” कहा जाता है।

आइए, श्री जी (Shree Ji) का ध्यान करें और प्रेम से यह आरती गाएं।

Radha Rani Ki Aarti Lyrics in Hindi

राधारानी तेरी आरती गाऊँ,
भानु दुलारी तेरी आरती गाऊँ।
आरती गाऊँ मैं तो वारि-वारि जाऊँ,
आरती गाऊँ तोपे वारि-वारि जाऊँ॥

कीरत लाली तेरी आरती गाऊँ,
श्यामा प्यारी तेरी आरती गाऊँ।
आरती गाऊँ मैं तो वारि-वारि जाऊँ,
आरती गाऊँ तोपे वारि-वारि जाऊँ॥

बरसाने वाली तेरी आरती गाऊँ,
राधारानी तेरी आरती गाऊँ॥

बरसाने की ऊँची अटारी,
छवि श्यामा की लागे अति प्यारी।
श्रीजी छवि पे बलि-बलि जाऊँ,
राधारानी तेरी आरती गाऊँ॥

लाडली तुम हो ब्रज की महारानी,
महिमा तुम्हरी जाए ना बखानी।
ब्रजधाम में वास मैं पाऊँ,
राधारानी तेरी आरती गाऊँ॥

कृष्ण हैं मिलते जिसके नाम से,
जपते हैं सब बड़े ही भाव से।
राधे-राधे गा के तुमको मनाऊँ,
राधारानी तेरी आरती गाऊँ॥

राधा नाम की अर्जी लगाकर,
बरसाना मंदिर में आकर।
संतन संग राधा गुण गाऊँ,
राधारानी तेरी आरती गाऊँ॥

भोरी-भोरी नवल किशोरी,
कारे कान्हा राधा गोरी।
चरणों में जिनके मैं शीश झुकाऊँ,
राधारानी तेरी आरती गाऊँ॥

Radha Rani Ki Aarti Lyrics in English

Radharani Teri Aarti Gaun,
Bhanu Dulari Teri Aarti Gaun.
Aarti Gaun Main To Vaari-Vaari Jaun,
Aarti Gaun Tope Vaari-Vaari Jaun॥

Keerat Laali Teri Aarti Gaun,
Shyama Pyari Teri Aarti Gaun.
Aarti Gaun Main To Vaari-Vaari Jaun,
Aarti Gaun Tope Vaari-Vaari Jaun॥

Barsane Wali Teri Aarti Gaun,
Radharani Teri Aarti Gaun॥

Barsane Ki Oonchi Ataari,
Chhavi Shyama Ki Laage Ati Pyari.
Shriji Chhavi Pe Bali-Bali Jaun,
Radharani Teri Aarti Gaun॥

Laadli Tum Ho Braj Ki Maharani,
Mahima Tumhari Jaaye Na Bakhani.
Braj Dhaam Mein Vaas Main Paun,
Radharani Teri Aarti Gaun॥

Krishna Hain Milte Jiske Naam Se,
Japte Hain Sab Bade Hi Bhaav Se.
Radhe-Radhe Ga Ke Tumko Manaun,
Radharani Teri Aarti Gaun॥

Radha Naam Ki Arzi Lagakar,
Barsana Mandir Mein Aakar.
Santan Sang Radha Gun Gaun,
Radharani Teri Aarti Gaun॥

Bhori-Bhori Naval Kishori,
Kaare Kaanha Radha Gori.
Charanon Mein Jinke Main Sheesh Jhukaun,
Radharani Teri Aarti Gaun॥

राधा जी की पूजा कृष्ण के बिना अधूरी है, और कृष्ण की राधा के बिना।

  1. युगल सरकार: “किशोरी जी की आरती के बाद बांके बिहारी जी की आरती (Banke Bihari Aarti) अवश्य गाएं, क्योंकि दोनों एक ही प्राण हैं।”
  2. कृष्ण भजन: “राधा नाम के साथ कान्हा को रिझाने के लिए सांवली सूरत पे मोहन (Sanwali Surat Pe Mohan) भजन गुनगुनाएं।

आरती का भाव और महत्व

श्री राधा रानी केवल भगवान कृष्ण की प्रेमिका ही नहीं, बल्कि उनकी आत्मा और आह्लादिनी शक्ति (Hladini Shakti) हैं। इस आरती की हर पंक्ति में गहरा रहस्य छिपा है:

  • प्यारे मोहन की प्यारी (Pyare Mohan Ki Pyari): आरती में कहा गया है कि राधा जी, मन को मोहने वाले ‘मोहन’ (कृष्ण) को भी अति प्रिय हैं। शास्त्रों में कहा गया है कि श्री कृष्ण केवल राधा जी के अधीन हैं। अगर आप कान्हा को पाना चाहते हैं, तो रास्ता राधा जी से होकर ही जाता है।
  • रण चढ़ि (Ran Chadhi) / रणछोड़ की प्यारी: कुछ पाठों में उन्हें शक्ति का रूप भी माना गया है जो भक्तों के संकट हरने के लिए तत्पर रहती हैं।
  • गंगा जमुना लहरी (Ganga Jamuna Lahari): राधा जी का प्रेम गंगा और यमुना की तरह पवित्र और निरंतर बहने वाला है, जो भक्त के पापों को धो देता है।

राधा नाम का प्रभाव

  1. शीघ्र फल प्राप्ति: ब्रज में मान्यता है कि श्री कृष्ण थोड़े नटखट हैं और देर से सुनते हैं, लेकिन ‘किशोरी जी’ (राधा रानी) बहुत दयालु हैं। वे अपने भक्तों की पुकार तुरंत सुनती हैं।
  2. कृष्ण प्रेम: जो राधा जी की आरती गाता है, उसे भगवान कृष्ण अपने आप मिल जाते हैं।
  3. बाधा निवारण: राधा रानी को ‘वृषभानु लली’ कहा जाता है। उनकी कृपा से जीवन की बड़ी से बड़ी बाधाएं (Obstacles) दूर हो जाती हैं।

निष्कर्ष

“राधारानी तेरी आरती गाऊँ” केवल एक गीत नहीं, बल्कि बरसाना धाम की हाजिरी है। जब हम सच्चे भाव से यह आरती गाते हैं, तो हमें मानसिक शांति और अलौकिक प्रेम का अनुभव होता है।

चाहे आप घर पर हों या मंदिर में, सुबह-शाम इस आरती का गायन आपके घर को ‘वृंदावन’ बना सकता है।

🙌 जय जय श्री राधे! 🙌

क्या आपको भी राधा नाम में सुकून मिलता है? अपनी हाजिरी लगाने के लिए नीचे कमेंट बॉक्स में “Radhe Radhe” या “जय श्री श्याम” जरूर लिखें। किशोरी जी आप पर कृपा करें।

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