ॐ जय जगदीश हरे आरती: Om Jai Jagdish Hare Aarti Lyrics

हरि ॐ! हिंदू धर्म में शायद ही कोई ऐसा घर होगा जहाँ “ॐ जय जगदीश हरे” (Om Jai Jagdish Hare) आरती न गूंजती हो। यह केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म की पहचान है। मूल रूप से यह भगवान विष्णु (Lord Vishnu) की आरती है, लेकिन इसे सत्यनारायण कथा, दिवाली पूजन और हर पारिवारिक उत्सव के अंत में गाया जाता है।

पंडित श्रद्धाराम फिल्लौरी जी द्वारा रचित यह आरती मन को असीम शांति देती है। अक्सर फिल्मों (जैसे ‘पूरब और पश्चिम’) या कैसेट्स (अनुराधा पौडवाल) में इसे सुनकर हम गुनगुनाते तो हैं, लेकिन कई बार इसके शुद्ध शब्दों और सही उच्चारण से चूक जाते हैं।

इसलिए, iLoveBhajan पर हम आपके लिए इस विश्व-प्रसिद्ध आरती के त्रुटिहीन लिरिक्स हिंदी (Hindi) और इंग्लिश (English) में लेकर आए हैं। चाहे आप “मात-पिता तुम मेरे” पंक्ति का अर्थ खोज रहे हों सब कुछ यहाँ उपलब्ध है।

आइये, जगत के पालनहार श्री हरि के चरणों में दीप जलाएं और प्रेम से आरती गाएं।

ॐ जय जगदीश हरे आरती Om Jai Jagdish Hare Aarti Lyrics
ॐ जय जगदीश हरे आरती: Om Jai Jagdish Hare Aarti Lyrics

ॐ जय जगदीश हरे आरती (Hindi Lyrics)

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे |
भक्त जनन के संकट, क्षण में दूर करे ||
ॐ जय जगदीश हरे…

जो ध्यावै फल पावै, दुःख विनसे मन का |
सुख सम्पति घर आवे, कष्ट मिटे तन का || 
ॐ जय जगदीश हरे ।

मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं किसकी |
तुम बिन और न दूजा, आस करूं मैं जिसकी || 
ॐ जय जगदीश हरे ।

तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी |
पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सब के स्वामी || 
ॐ जय जगदीश हरे ।

तुम करुणा के सागर, तुम पालनकर्ता|
मैं मूरख खल कामी,  कृपा करो भर्ता || 
ॐ जय जगदीश हरे ।

तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति |
किस विधि मिलूं दयामय, तुमको मैं कुमति ||
ॐ जय जगदीश हरे।

दीनबन्धु दुःखहर्ता, तुम रक्षक मेरे |
अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे ||
ॐ जय जगदीश हरे। 

विषय-विकार मिटाओ, पाप हरो देवा |
श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ, सन्तन की सेवा ||
ॐ जय जगदीश हरे

तन मन धन तेरा, स्वामी सब कुछ है तेरा |
तेरा तुझ को अर्पण, क्या लागे मेरा ||
ॐ जय जगदीश हरे । 

श्री जगदीश जी की आरती, जो कोई नर गावे |
कहत शिवानन्द स्वामी सुख सम्पति पावे || 

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे |
भक्त जनन के संकट, क्षण में दूर करे ||
ॐ जय जगदीश हरे…

Om Jai Jagdish Hare Aarti English Lyrics

Om Jai Jagadish Hare, Swami Jai Jagadish Hare
Bhakt Jano Ke Sankat, Kshan Men Door Kare
Om Jai Jagadish Hare

Jo Dhyaave Phal Paave, Dukh Vinse Man Kaa
Sukh Sampati Ghar Ave,Kasht Mite Tan Kaa
Om Jai Jagadish Hare

Maat Pita Tum Mere, Sharan Gahoon Kiski
Tum Bin Aur Na Dooja, Aas Karoon Jiski
Om Jai Jagadish Hare

Tum Pooran Paramatma, Tum Antaryami
Paar Brahm Parameshwar,Tum Sabke Swami 
Om Jai Jagadish Hare

Tum Karuna Ke Saagar, Tum Paalan Karta
Main Moorakh Khalakhami, Kripa Karo Bharta
Om Jai Jagadish Hare

Tum Ho Ek Agochar, Sab Ke Praan Pati
Kis Vidhi Miloon Dayamaya, Tum Ko Main Kumati
Om Jai Jagdish Hare

Deen Bandhu Dukh Harta, Tum Rakshak Mere
Apne Haath Uthao, Dwaar Pada Tere
Om Jai Jagadish Hare

Vishay Vikaar Mitao, Paap Haro Deva
Shradha Bhakti Badhao, Santan Ki Seva
Om Jai Jagadish Hare

Tan-Man-Dhan Hai Tera Swami Sab Kuchh Hai Tera
Tera Tujhko Arpan, Kyal Lage Mera
Om Jai Jagadish Hare

Shree Jagdish Ji Ki Arti Jo Koi Nar Gave
Kahat Hai Shivanand Swami Sukh Sampati Pave
Om Jai Jagadish Hare

Om Jai Jagadish Hare, Swami Jai Jagadish Hare
Bhakt Jano Ke Sankat, Kshan Men Door Kare
Om Jai Jagadish Hare

यह आरती बहुत चमत्कारी है क्योंकि इसमें जीवन की हर समस्या चाहे वह तन (Health), मन (Mind) या धन (Wealth) से जुड़ी हो का समाधान मांगा गया है।

श्री जगदीश आरती पढ़ने के चमत्कारिक लाभ

यह आरती हिन्दू धर्म में ‘सर्वव्यापी’ मानी जाती है। चाहे सत्यनारायण की कथा हो या दीपावली पूजन, इस आरती को गाने से पूजा पूर्ण मानी जाती है। इसके पाठ से जीवन में अद्भुत सकारात्मक बदलाव आते हैं:

  • सुख-संपत्ति की प्राप्ति: आरती की सबसे प्रसिद्ध पंक्ति है “सुख संपत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का”। इसका नित्य गायन करने से घर में धन-धान्य की कमी नहीं रहती और दरिद्रता दूर होती है।
  • शारीरिक कष्टों का निवारण: भगवान विष्णु पालनहार हैं। जो भक्त श्रद्धा से गाते हैं “कष्ट मिटे तन का”, उन्हें शारीरिक रोगों और पीड़ा से मुक्ति मिलती है और स्वास्थ्य उत्तम रहता है।
  • मानसिक विकारों का नाश: हम आरती में मांगते हैं “विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा”। इसे गाने से मन से काम, क्रोध, लोभ और मोह जैसी बुरी भावनाएं दूर होती हैं और मन पवित्र होता है।
  • समर्पण और त्याग की भावना: “तेरा तुझको अर्पण, क्या लागे मेरा” यह पंक्ति मनुष्य के अहंकार (Ego) को खत्म करती है। इससे जीवन में तनाव कम होता है और ईश्वर के प्रति विश्वास गहरा होता है।
  • पारिवारिक एकता: अक्सर यह आरती पूरा परिवार एक साथ मिलकर गाता है। इससे परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम बढ़ता है और गृह-क्लेश (Family Disputes) समाप्त होते हैं।

विशेष उपाय: इस आरती को गाते समय ताति सेवा (ताली बजाना) और घंटी का नाद अवश्य करना चाहिए। इससे घर की नकारात्मक ऊर्जा (Negative Energy) तुरंत नष्ट हो जाती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ॐ जय जगदीश हरे आरती किसकी है?

Om Jai Jagdish Hare यह एक सार्वभौमिक आरती है, लेकिन यह मुख्य रूप से भगवान विष्णु और उनके सभी अवतारों (कृष्ण, राम, आदि) को समर्पित है। इसे भगवान जगदीश (ब्रह्मांड के स्वामी) की स्तुति के रूप में गाया जाता है।

इस आरती को कब गाया जाता है?

इस आरती को आमतौर पर पूजा के अंत में, त्योहारों के दौरान, और विशेष धार्मिक अनुष्ठानों में गाया जाता है। many families also sing it daily during their evening prayers.

क्या इस आरती का कोई विशेष लाभ है?

मान्यता है कि सच्चे मन और श्रद्धा से यह आरती गाने से भक्तों के सभी संकट दूर होते हैं, मन को शांति मिलती है और घर में सुख-समृद्धि आती है।

‘जगदीश’ शब्द का क्या अर्थ है?

‘जगदीश’ संस्कृत के दो शब्दों ‘जगत’ (ब्रह्मांड) और ‘ईश’ (स्वामी) से मिलकर बना है। इसका अर्थ है “पूरे ब्रह्मांड के स्वामी” या “भगवान”।

क्या इस आरती के अलग-अलग संस्करण हैं?

हां, कुछ क्षेत्रों में कुछ पंक्तियाँ थोड़ी अलग हो सकती हैं, लेकिन ऊपर दिया गया संस्करण सबसे आम और व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाने वाला है।

1 thought on “ॐ जय जगदीश हरे आरती: Om Jai Jagdish Hare Aarti Lyrics”

Leave a Comment

🙏 ilovebhajan को सहयोग करें

अगर आपको हमारी वेबसाइट पसंद है, तो कृपया इसे चलाने में हमारी मदद करें।

UPI QR Code