Maa sharde kaha tu lyrics: माँ शारदे कहा तू बिना बजा रही है

॥ ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः ॥ 🙏 विद्यालयों के प्रार्थना सभा (Assembly) में सबसे ज्यादा गाया जाने वाला भजन अगर कोई है, तो वह है “माँ शारदे कहाँ तू, वीणा बजा रही है।”

यह भजन केवल एक गीत नहीं, बल्कि एक अबोध बालक की पुकार है। इसमें भक्त माँ सरस्वती को ढूंढ रहा है कि वे किस लोक में बैठकर अपनी वीणा की मधुर तान से जगत को मोहित कर रही हैं। यह प्रार्थना हमें सिखाती है कि जब हम अज्ञान के अंधेरे में भटक जाएं, तो केवल माँ शारदा का प्रकाश ही हमें राह दिखा सकता है।

खासियत: इस भजन की शुरुआत प्रसिद्ध संस्कृत श्लोक “सरस्वती नमस्तुभ्यं” से होती है, जो विद्या आरंभ करने का मूल मंत्र है। चाहे वसंत पंचमी हो या दैनिक पढ़ाई की शुरुआत, इस भजन को गाने से मन शांत और एकाग्र (Focused) हो जाता है।

आइए, इस भावपूर्ण भजन के हिंदी और इंग्लिश लिरिक्स को पढ़ें और माँ से ज्ञान का वरदान मांगें।

जानकारी (Details)विवरण (Description)
भजन का नाममाँ शारदे कहाँ तू (Maa Sharde Kahan Tu)
देवीमाँ सरस्वती (शारदा)
प्रकारप्रार्थना / वंदना
मुख्य भावअज्ञानता दूर करना
लोकप्रियतास्कूल प्रार्थना, वसंत पंचमी

Maa Sharde Kahan Tu Lyrics in Hindi

॥ श्लोक ॥
सरस्वती नमस्तुभ्यं, वरदे कामरूपिणी।
विद्यारम्भं करिष्यामि, सिद्धिर्भवतु मे सदा॥

॥ मुखड़ा ॥
माँ शारदे कहाँ तू, वीणा बजा रही है।
किस मंजु ज्ञान से तू, जग को लुभा रही है॥
माँ शारदे कहाँ तू…

॥ अंतरा 1 ॥
किस भाव में भवानी, तू मग्न हो रही है।
विनती नहीं हमारी, क्यों माँ तू सुन रही है॥

हम दीन बाल कब से, विनती सुना रहें हैं।
चरणों में तेरे माता, हम सर झुका रहे हैं॥
हम सर झुका रहे हैं… माँ शारदे कहाँ तू…

॥ अंतरा 2 ॥
अज्ञान तुम हमारा, माँ शीघ्र दूर कर दो।
द्रुत ज्ञान शुभ्र हम में, माँ शारदे तू भर दे॥

बालक सभी जगत के, सुत मात हैं तुम्हारे।
प्राणों से प्रिय है हम, तेरे पुत्र सब दुलारे॥
तेरे पुत्र सब दुलारे… माँ शारदे कहाँ तू…

॥ अंतरा 3 ॥
हमको दयामयी तू, ले गोद में पढ़ाओ।
अमृत जगत का हमको, माँ शारदे पिलाओ॥

मातेश्वरी तू सुन ले, सुंदर विनय हमारी।
करके दया तू हर ले, बाधा जगत की सारी॥
बाधा जगत की सारी…

॥ समापन ॥
माँ शारदे कहाँ तू, वीणा बजा रही है।
किस मंजु ज्ञान से तू, जग को लुभा रही है॥

माँ शारदे कहाँ तू… वीणा बजा रही है…

Maa Sharde Kahan Tu Lyrics in English (Hinglish)

॥ Shlok ॥
Saraswati Namastubhyam, Varade Kaamrupini.
Vidyarambham Karishyami, Siddhirbhavatu Me Sada.

॥ Mukhda ॥
Maa Sharde Kahan Tu, Veena Baja Rahi Hai.
Kis Manju Gyan Se Tu, Jag Ko Lubha Rahi Hai.
Maa Sharde Kahan Tu…

॥ Antara 1 ॥
Kis Bhav Mein Bhavani, Tu Magn Ho Rahi Hai.
Vinti Nahin Hamari, Kyon Maa Tu Sun Rahi Hai.

Hum Deen Baal Kab Se, Vinti Suna Rahe Hain.
Charnon Mein Tere Mata, Hum Sar Jhuka Rahe Hain.
Hum Sar Jhuka Rahe Hain… Maa Sharde Kahan Tu…

॥ Antara 2 ॥
Agyan Tum Hamara, Maa Sheeghra Door Kar Do.
Drut Gyan Shubhra Hum Mein, Maa Sharde Tu Bhar De.

Balak Sabhi Jagat Ke, Sut Maat Hain Tumhare.
Pranon Se Priya Hai Hum, Tere Putra Sab Dulare.
Tere Putra Sab Dulare… Maa Sharde Kahan Tu…

॥ Antara 3 ॥
Humko Dayamayi Tu, Le God Mein Padhao.
Amrit Jagat Ka Humko, Maa Sharde Pilao.

Mateshwari Tu Sun Le, Sundar Vinay Hamari.
Karke Daya Tu Har Le, Badha Jagat Ki Sari.
Badha Jagat Ki Sari…

॥ Outro ॥
Maa Sharde Kahan Tu, Veena Baja Rahi Hai.
Kis Manju Gyan Se Tu, Jag Ko Lubha Rahi Hai.

Maa Sharde Kahan Tu… Veena Baja Rahi Hai…

भावार्थ और लाभ

यह भजन केवल शब्दों का मेल नहीं है, बल्कि एक अबोध बालक और उसकी जगत-जननी माँ के बीच का संवाद है। आइए, इसके मर्म को समझें:

भावार्थ (Meaning)

  1. खोज और पुकार: भजन की शुरुआत में भक्त पूछता है “माँ शारदे कहाँ तू, वीणा बजा रही है?” यह पंक्ति दर्शाती है कि ईश्वर सर्वव्यापी है, लेकिन अज्ञानता के कारण हम उन्हें देख नहीं पाते। भक्त माँ की उस दिव्य ध्वनि (वीणा) को ढूंढ रहा है जो पूरे ब्रह्मांड को संचालित करती है।
  2. बाल सुलभ हठ: भक्त माँ से शिकायत करता है कि “विनती नहीं हमारी, क्यों माँ तू सुन रही है?” जैसे एक बच्चा अपनी माँ से रूठ जाता है, वैसे ही भक्त कह रहा है कि हम कब से पुकार रहे हैं, आप हमारी सुन क्यों नहीं रहीं?
  3. अज्ञान का नाश: मुख्य प्रार्थना यह है “अज्ञान तुम हमारा, माँ शीघ्र दूर कर दो।” यहाँ धन-दौलत नहीं, बल्कि बुद्धि और ज्ञान का प्रकाश मांगा गया है।
  4. गोद में शिक्षा: “हमको दयामयी तू, ले गोद में पढ़ाओ” यह समर्पण की पराकाष्ठा है। भक्त मानता है कि किताबी ज्ञान से बड़ा वह ज्ञान है जो माँ के आंचल में मिलता है।

इस भजन के लाभ

इस वंदना को नियमित रूप से, विशेषकर विद्यार्थियों द्वारा गाए जाने के कई लाभ हैं:

  • एकाग्रता (Concentration): इसके नियमित पाठ से मन की चंचलता शांत होती है और पढ़ाई में ध्यान लगता है।
  • नकारात्मकता का नाश: जब हम कहते हैं “बाधा जगत की सारी”, तो यह हमारे मन से असफलता के डर और तनाव (Stress) को दूर करता है।
  • विनम्रता: यह भजन हमें सिखाता है कि हम चाहे कितने भी ज्ञानी हो जाएं, ईश्वर के सामने हम हमेशा एक ‘बालक’ ही रहेंगे। यह अहंकार (Ego) को मिटाता है।
  • वाक सिद्धि: संगीत और कला के क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए यह वाणी को मधुर और प्रभावशाली बनाने का अचूक माध्यम है।

निष्कर्ष (Conclusion)

“माँ शारदे कहाँ तू” हमें याद दिलाता है कि जीवन में सच्चा मार्गदर्शक केवल ‘ज्ञान’ है। जब दुनिया के शोर में हम खुद को खोया हुआ महसूस करें, तो यह भजन हमें वापस अपनी जड़ों और आध्यात्मिकता से जोड़ता है। इसे केवल स्कूल की प्रार्थना न समझें, बल्कि इसे अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएं।

🙏 आपकी बारी (Your Turn): क्या आपको अपने स्कूल के दिन याद आ गए? अपनी पुरानी यादों को ताज़ा करने के लिए कमेंट बॉक्स में अपने स्कूल का नाम और “Jai Maa Sharde” जरूर लिखें।

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