Karpur Gauram Aarti Lyrics त्वमेव माता च पिता त्वमेव

“हर हर महादेव!” 🔱

हिंदू धर्म में, चाहे आप किसी भी देवी-देवता की पूजा करें गणेश जी, दुर्गा माँ या श्री राम आरती का समापन हमेशा भगवान शिव के इस महामंत्र के साथ ही होता है: “कर्पूरगौरं करुणावतारं, संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्।”

यजुर्वेद से लिया गया यह प्राचीन मंत्र भगवान शिव के दिव्य स्वरूप का वर्णन करता है। इसका अर्थ है “जो कपूर के समान श्वेत (गौर) हैं और करुणा के साक्षात् अवतार हैं।” इसके तुरंत बाद “त्वमेव माता च पिता त्वमेव” गाकर भक्त अपना सब कुछ ईश्वर के चरणों में समर्पित कर देते हैं। यह मंत्रपुष्पांजलि (Mantra Pushpanjali) पूजा को पूर्णता प्रदान करती है।

अक्सर लोग इस मंत्र को बहुत तेज गति में गाते हैं जिससे इसके संस्कृत शब्दों का उच्चारण गलत हो जाता है। इसलिए, iLoveBhajan पर हम आपके लिए इस शक्तिशाली स्तुति के शुद्ध लिरिक्स हिंदी (Hindi) और इंग्लिश (English) में लेकर आए हैं।

आइये, हाथ में पुष्प लेकर शिव जी का ध्यान करें और इस मंत्र का उच्चारण करें।

त्वमेव माता च पिता त्वमेव ।
त्वमेव बंधुक्ष्च सखा त्वमेव ।
त्वमेव विध्या द्रविणं त्वमेव ।
त्वमेव सर्वं मम देवदेव॥

कर्पूरगौरं करुणावतारं ।
संसारसारं भुजगेन्द्रहारम् ।
सदावसन्तं हृदयारविन्दे ।
भवं भवानीसहितं नमामि ॥

लिलम नमोस्यं मलगो मलागं ।
सीता समारोह पित्वा नमघाम ।
बाणों र मासा एकचा रुचापम ।
नमामी रामं रघुवन सनातनम ॥

बोल सिया बलराम चंद्र की जय

Tvameva Mata Cha Pita Tvameva
Tvameva Bandhukshcha Sakha Tvameva
Tvameva Vidya Dravinam Tvameva
Tvameva Sarvam Mama Devadev

Karpur Gauram Karunavataram
Sansarasarum Bhujagendraharm
Sadavasantam Hridayaravinde
Bhvam Bhavani Sahitam Namami

Lilam Namosyam Malgo Malagam
Sita Samaroh Pitwa Namagham
Bano R Masa Ekcha Ruchapam
Namami Ramam Raghuwan Sanatanam

Bol Siya Balram Chandr Ki Jai
Bol Siya Balram Chandr Ki Jai

कर्पूरगौरं मंत्र जाप के आध्यात्मिक लाभ

शास्त्रों के अनुसार, भगवान शिव शमशान वासी हैं और उनका स्वरूप भयंकर हो सकता है, लेकिन इस मंत्र में हम उनके ‘करुणावतार’ (दया के सागर) रूप की स्तुति करते हैं। इसे पढ़ने के गहरे लाभ हैं:

  • पूजा की पूर्णता: हिंदू धर्म में माना जाता है कि पूजा-पाठ में अनजाने में हुई किसी भी गलती या कमी को यह मंत्र पूरा कर देता है। इसे गाए बिना आरती अधूरी मानी जाती है।
  • मृत्यु भय से मुक्ति: शिव जी को ‘मृत्युंजय’ कहा जाता है। “संसारसारं” का अर्थ है कि वे ही इस संसार का सार (मूल) हैं। इस मंत्र का नियमित जाप करने से अकाल मृत्यु और जीवन का भय समाप्त हो जाता है।
  • मानसिक शांति और शुद्धता: “कर्पूरगौरं” का अर्थ है कपूर जैसा श्वेत और पवित्र। इस मंत्र के उच्चारण से मन के विकार (बुरे विचार) कपूर की तरह उड़ जाते हैं और मस्तिष्क को गहरी शांति मिलती है।
  • पूर्ण समर्पण (Surrender): “त्वमेव माता च पिता त्वमेव” यह पंक्तियां ईश्वर के प्रति पूर्ण आत्म-समर्पण दर्शाती हैं। इससे भक्त का अहंकार (Ego) नष्ट होता है और उसे महसूस होता है कि ईश्वर ही उसका एकमात्र सहारा है।
  • भगवान शिव की कृपा: यह यजुर्वेद का अत्यंत प्राचीन और शक्तिशाली मंत्र है। इसे भाव सहित गाने से महादेव बहुत जल्दी प्रसन्न होते हैं और भक्त पर अपनी करुणा बरसाते हैं।

विशेष टिप: इस मंत्र को गाते समय आरती की थाली में कपूर (Camphor) जलाकर घुमाना चाहिए। जैसे कपूर जलकर सुगंध फैलाता है और खुद मिट जाता है, वैसे ही यह मंत्र हमारे अहंकार को मिटाकर जीवन को भक्ति की सुगंध से भर देता है।

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