॥ ॐ कालभैरवाय नमः ॥ 🙏 क्या आप जीवन में अज्ञात भय, शत्रु बाधा या ग्रह दोष से परेशान हैं? शैव परंपरा में कालभैरव को ‘काशी का कोतवाल’ और भगवान शिव का सबसे उग्र, फिर भी सबसे दयालु स्वरूप माना जाता है।
आदि गुरु शंकराचार्य द्वारा रचित “कालभैरवाष्टकम्” (Kaal Bhairav Ashtakam) एक अत्यंत शक्तिशाली स्तोत्र है। इसमें कुल 8 श्लोक हैं जो भगवान कालभैरव के स्वरूप का वर्णन करते हैं—जो दिगंबर हैं, सर्पों का यज्ञोपवीत पहनते हैं और पापियों को दंड देने के साथ-साथ अपने भक्तों को ‘अभय’ (निडरता) प्रदान करते हैं।
जब हम गाते हैं “काशिकापुराधिनाथ कालभैरवं भजे” (मैं काशी नगरी के स्वामी कालभैरव को भजता हूँ), तो यह केवल स्तुति नहीं, बल्कि मृत्यु के भय (काल) पर विजय पाने की घोषणा है।
आइए, अहंकार और भय का नाश करने वाले प्रभु कालभैरव के चरणों में यह अष्टकम अर्पित करें।
| जानकारी (Details) | विवरण (Description) |
| स्तोत्र का नाम | कालभैरवाष्टकम् (Kaal Bhairav Ashtakam) |
| रचयिता | आदि गुरु शंकराचार्य |
| देवता | श्री कालभैरव (भगवान शिव का रौद्र रूप) |
| स्थान | काशी (वाराणसी) |
| विशेष दिन | कालाष्टमी, रविवार, मंगलवार |
| मुख्य फल | भय, शोक और पापों का नाश |
Kaal Bhairav Ashtakam Lyrics in Hindi
देवराजसेव्यमानपावनांघ्रिपङ्कजं व्यालयज्ञसूत्रमिन्दुशेखरं कृपाकरम् ।
नारदादियोगिवृन्दवन्दितं दिगंबरं काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे ॥ १॥
भानुकोटिभास्वरं भवाब्धितारकं परं नीलकण्ठमीप्सितार्थदायकं त्रिलोचनम् ।
कालकालमंबुजाक्षमक्षशूलमक्षरं काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे ॥ २॥
शूलटंकपाशदण्डपाणिमादिकारणं श्यामकायमादिदेवमक्षरं निरामयम् ।
भीमविक्रमं प्रभुं विचित्रताण्डवप्रियं काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे ॥ ३॥
भुक्तिमुक्तिदायकं प्रशस्तचारुविग्रहं भक्तवत्सलं स्थितं समस्तलोकविग्रहम् ।
विनिक्वणन्मनोज्ञहेमकिङ्किणीलसत्कटिं काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे॥ ४॥
धर्मसेतुपालकं त्वधर्ममार्गनाशनं कर्मपाशमोचकं सुशर्मधायकं विभुम् ।
स्वर्णवर्णशेषपाशशोभितांगमण्डलं काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे ॥ ५॥
रत्नपादुकाप्रभाभिरामपादयुग्मकं नित्यमद्वितीयमिष्टदैवतं निरंजनम् ।
मृत्युदर्पनाशनं करालदंष्ट्रमोक्षणं काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे ॥ ६॥
अट्टहासभिन्नपद्मजाण्डकोशसंततिं दृष्टिपात्तनष्टपापजालमुग्रशासनम् ।
अष्टसिद्धिदायकं कपालमालिकाधरं काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे ॥ ७॥
भूतसंघनायकं विशालकीर्तिदायकं काशिवासलोकपुण्यपापशोधकं विभुम् ।
नीतिमार्गकोविदं पुरातनं जगत्पतिं काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे ॥ ८॥
॥ फल श्रुति॥
कालभैरवाष्टकं पठंति ये मनोहरं ज्ञानमुक्तिसाधनं विचित्रपुण्यवर्धनम् ।
शोकमोहदैन्यलोभकोपतापनाशनं प्रयान्ति कालभैरवांघ्रिसन्निधिं नरा ध्रुवम् ॥
॥इति कालभैरवाष्टकम् संपूर्णम् ॥
Kaal Bhairav Ashtakam Lyrics in English (Hinglish)
Devaraaj sevyamaan paavananghri pankajam
Vyaal yajna sutram indu shekharam kripaakaram ।
Naaradaadi yogi vrinda vanditam digambaram
Kaashikaapuraadhinaath Kaalbhairavam bhaje ॥1॥
Bhaanu koti bhaasvaram bhavaabdhi taarakam param
Neelkantham eepsitaarth daayakam trilochanam ।
Kaalkaalam ambujaaksham akshashoolam aksharam
Kaashikaapuraadhinaath Kaalbhairavam bhaje ॥2॥
Shool tank paash dand paanim aadikaaranam
Shyaam kaayam aadidevam aksharam niraamayam ।
Bheem vikramam prabhum vichitra taandav priyam
Kaashikaapuraadhinaath Kaalbhairavam bhaje ॥3॥
Bhukti mukti daayakam prashast chaaru vigraham
Bhakt vatsalam sthitam samast lok vigraham ।
Vinikwannan manojnya hema kinkini lasat katim
Kaashikaapuraadhinaath Kaalbhairavam bhaje ॥4॥
Dharma setu paalakam tv adharma maarg naashanam
Karma paash mochakam susharma daayakam vibhum ।
Svarna varna shesh paash shobhit ang mandalam
Kaashikaapuraadhinaath Kaalbhairavam bhaje ॥5॥
Ratna paaduka prabhaa biraam paad yugmakam
Nitya adviteeyam ishta daivatam niranjanam ।
Mrityu darpa naashanam karaal danshtra mokshanam
Kaashikaapuraadhinaath Kaalbhairavam bhaje ॥6॥
Attahaas bhinna padmajaand kosh santatim
Drishti paat tanasht paap jaal mugra shaasanam ।
Ashta siddhi daayakam kapaal maalikaa dharam
Kaashikaapuraadhinaath Kaalbhairavam bhaje ॥7॥
Bhoot sangh naayakam vishaal keerti daayakam
Kaashi vaas lok punya paap shodhakam vibhum ।
Neeti maarg kovidam puraatanam jagat patim
Kaashikaapuraadhinaath Kaalbhairavam bhaje ॥8॥
॥ Phal Shruti ॥
Kaalbhairavaashtakam pathanti ye manoharam
Gyaan mukti saadhanam vichitra punya vardhanam ।
Shok moh dainy lobh kop taap naashanam
Prayaanti Kaalbhairav anghri sannidhim nara dhruvam ॥
॥ Iti Kaalbhairavaashtakam sampoornam ॥
भावार्थ
कालभैरवाष्टकम के कुछ मुख्य अंशों का अर्थ:
- देवराजसेव्यमान…: जिनके चरण कमलों की सेवा देवराज इंद्र करते हैं, जिन्होंने साँपों का यज्ञोपवीत पहना है और मस्तक पर चंद्रमा धारण किया है। वे काशी के स्वामी हैं, मैं उन्हें भजता हूँ।
- कालकालम…: जो मृत्यु (काल) के भी काल हैं (महाकाल), जिनके तीन नेत्र हैं और जो भक्तों की इच्छा पूरी करते हैं।
- धर्मसेतुपालकं…: जो धर्म की रक्षा करते हैं और अधर्म के मार्ग का नाश करते हैं।
- फल श्रुति: जो व्यक्ति इस मनोहर अष्टकम का पाठ करता है, वह शोक, मोह, गरीबी, लोभ और क्रोध से मुक्त होकर अंत में कालभैरव के चरणों में स्थान पाता है।
कालभैरवाष्टक के लाभ
- भय मुक्ति: यह स्तोत्र मृत्यु के भय और शत्रुओं के डर को समाप्त करने के लिए सबसे शक्तिशाली माना जाता है।
- ग्रह शांति: राहु और केतु के दुष्प्रभावों को कम करने के लिए इसका पाठ अचूक है।
- न्याय: यदि कोई आपको अकारण परेशान कर रहा हो, तो कालभैरव की शरण लेने से न्याय मिलता है।
- आध्यात्मिक उन्नति: यह अहंकार को तोड़कर ज्ञान और मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करता है।
Conclusion (निष्कर्ष)
कालभैरवाष्टकम् केवल एक पूजा विधि नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक निडर शैली है। जो व्यक्ति काशी के कोतवाल की शरण में आ जाता है, उसे दुनिया की कोई ताकत डरा नहीं सकती। इसे पूर्ण श्रद्धा और पवित्रता के साथ पढ़ें।
🙏 हर हर महादेव! 🙏 क्या आप काशी विश्वनाथ गए हैं? बाबा कालभैरव की कृपा पाने के लिए कमेंट में “Jai Kaal Bhairav” जरूर लिखें।

