जय बजरंगबली! कलयुग में हनुमान जी ही एकमात्र ऐसे जागृत देवता हैं जो अपने भक्तों की पुकार तुरंत सुनते हैं। जब भी मन में भय हो, कोई संकट आ पड़े या आत्मविश्वास की कमी लगे, तो “आरती कीजै हनुमान लला की, दुष्ट दलन रघुनाथ कला की” का पाठ संजीवनी बूटी की तरह काम करता है।
मंगलवार और शनिवार को मंदिरों में गूंजने वाली Hanuman Ji Ki Aarti गोस्वामी तुलसीदास जी (या पारंपरिक स्रोतों) द्वारा रचित मानी जाती है। इसमें हनुमान जी के बालपन से लेकर लंका दहन और लक्ष्मण जी के प्राण बचाने तक की महिमा का गुणगान है। यह आरती न केवल शत्रुओं का नाश करती है, बल्कि भक्तों को अभय प्रदान करती है।
अक्सर हम आरती गाते समय कुछ शब्दों का गलत उच्चारण कर जाते हैं। इसलिए, iLoveBhajan पर हम आपके लिए पवनपुत्र हनुमान की इस शक्तिशाली आरती के Hanuman Ji Ki Aarti Lyrics (Hindi) और इंग्लिश (English) में लेकर आए हैं।
आइये, श्री राम के परम भक्त हनुमान जी का ध्यान करें और पूरी शक्ति से आरती गाएं।
श्री हनुमान जी की आरती
आरती कीजै हनुमान लला की।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।
जाके बल से गिरिवर कांपे।
रोग दोष जाके निकट न झांके।।
अंजनि पुत्र महाबलदायी।
संतान के प्रभु सदा सहाई।।
दे बीरा रघुनाथ पठाए।
लंका जारी सिया सुध लाए।।
लंका सो कोट समुद्र सी खाई।
जात पवनसुत बार न लाई।।
लंका जारी असुर संहारे।
सियारामजी के काज संवारे।।
लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे।
आणि संजीवन प्राण उबारे।।
पैठी पताल तोरि जमकारे।
अहिरावण की भुजा उखाड़े।।
बाएं भुजा असुर दल मारे।
दाहिने भुजा संतजन तारे।।
सुर-नर-मुनि जन आरती उतारे।
जै जै जै हनुमान उचारे।।
कंचन थार कपूर लौ छाई।
आरती करत अंजना माई।।
लंकविध्वंस कीन्ह रघुराई।
तुलसीदास प्रभु कीरति गाई।।
जो हनुमानजी की आरती गावै।
बसी बैकुंठ परमपद पावै।।
आरती कीजै हनुमान लला की।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।
Hanuman Ji Ki Aarti Lyrics in Hinglish
Aarti keejai Hanuman lala ki
Dusht dalan Raghunath kala ki
Jaake bal se girivar kaanpe
Rog dosh jaake nikat na jhaanpe
Anjani putra maha baldaayi
Santan ke Prabhu sada sahaayi
De Beera Raghunath pathaaye
Lanka jaari Siya sudh laaye
Lanka so kot samudra si khaai
Jaat Pavan-sut baar na laai
Lanka jaari asur sanhaare
Siyaram ji ke kaaj sanvaare
Lakshman moorchhit pade sakaare
Aani Sanjeevan praan ubaare
Paithi Pataal tori Jamkaare
Ahiravan ki bhuja ukhaare
Baaye bhuja asur dal maare
Daahine bhuja santjan taare
Sur nar muni jan aarti utaare
Jai jai jai Hanuman uchaare
Kanchan thaar kapoor lau chhaai
Aarti karat Anjana maai
Lankavidhvans keenh Raghuraai
Tulsidas Prabhu keerti gaai
Jo Hanuman ji ki aarti gaavai
Basi Baikunth param pad paavai
Aarti keejai Hanuman lala ki
Dusht dalan Raghunath kala ki
श्री हनुमान आरती पढ़ने के चमत्कारिक लाभ
कलयुग में हनुमान जी की आरती को एक ‘रक्षा कवच’ माना जाता है। मंगलवार और शनिवार को इसका पाठ करने से जीवन में आने वाले बड़े से बड़े संकट टल जाते हैं:
- शत्रु और भय का नाश: आरती की पहली ही पंक्ति है “दुष्ट दलन रघुनाथ कला की”। इसका पाठ करने से गुप्त और प्रत्यक्ष शत्रुओं का नाश होता है और मन से हर प्रकार का भय (Fear) निकल जाता है।
- रोग और कष्ट से मुक्ति: आरती में कहा गया है “रोग दोष जाके निकट न झांकै”। जो भक्त नियम से यह आरती गाते हैं, उन्हें लंबी बीमारियाँ नहीं सतातीं और शारीरिक पीड़ा दूर होती है।
- भूत-प्रेत और ऊपरी बाधा: हनुमान जी के नाम से ही बुरी शक्तियां कांपती हैं। यदि किसी को नजर लगी हो या बुरे सपने आते हों, तो सोने से पहले यह आरती पढ़ने से नकारात्मक ऊर्जा दूर भाग जाती है।
- शनि दोष से राहत: शनिवार को हनुमान जी की आरती करने से शनि देव प्रसन्न होते हैं। जिन लोगों पर शनि की साढ़ेसाती या ढैया चल रही है, उन्हें यह पाठ अवश्य करना चाहिए।
- असंभव कार्य भी संभव: हनुमान जी ने “लंका सो कोट समुद्र सी खाई” जैसा असंभव कार्य किया था। यह आरती भक्तों को आत्मविश्वास देती है कि उनका कोई भी कठिन कार्य रुका नहीं रहेगा।
विशेष उपाय: मंगलवार को हनुमान जी को चमेली के तेल में सिंदूर मिलाकर चोला चढ़ाएं और फिर यह आरती गाएं। इससे बजरंगबली प्रसन्न होकर तत्काल मनोकामना पूरी करते हैं।


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