Ganesh Chalisa: जय जय गणपति राजू (Lyrics in Hindi & English) | PDF Download

गणपति बप्पा मोरया! यदि आप हर कार्य को निर्विघ्न पूर्ण करने के लिए श्री गणेश चालीसा (Shri Ganesh Chalisa) का शुद्ध पाठ और लिरिक्स खोज रहे हैं, तो आप सही जगह पर हैं।

हिन्दू धर्म में किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत भगवान गणेश के नाम से होती है। बुधवार के दिन “जय जय गणपति राजू” और “जय गणपति सदगुण सदन” का पाठ करने से जीवन के बड़े से बड़े विघ्न (Obstacles) दूर हो जाते हैं। हमारे शास्त्रों और संतों के अनुभव के अनुसार, जो भक्त नित्य गणेश चालीसा का पाठ करते हैं, उनके घर में रिद्धि-सिद्धि और शुभ-लाभ का स्थायी वास होता है।

अक्सर भक्त चालीसा पढ़ते समय कठिन शब्दों के उच्चारण में गलती कर देते हैं। इसलिए, इस पोस्ट में हमने गणेश चालीसा के लिरिक्स हिंदी (Hindi) और इंग्लिश (English) दोनों भाषाओं में उपलब्ध कराए हैं। साथ ही, आपकी सुविधा के लिए एक High-Quality PDF भी दी गई है जिसे आप डाउनलोड करके अपनी नित्य पूजा में शामिल कर सकते हैं।

आइये, विघ्नहर्ता विनायक का ध्यान करें और चालीसा का पाठ शुरू करें।

गणेश चालीसा के लिरिक्स हिंदी में

दोहा
जय गणपति सद्गुण सदन कविवर बदन कृपाल।
विघ्न हरण मंगल करण जय जय गिरिजालाल॥

॥ चौपाई ॥
जय जय जय गणपति राजू।
मंगल भरण करण शुभ काजू॥

जय गजबदन सदन सुखदाता।
विश्व विनायक बुद्धि विधाता॥

वक्र तुण्ड शुचि शुण्ड सुहावन।
तिलक त्रिपुण्ड भाल मन भावन॥

राजित मणि मुक्तन उर माला।
स्वर्ण मुकुट शिर नयन विशाला॥

पुस्तक पाणि कुठार त्रिशूलं।
मोदक भोग सुगन्धित फूलं॥

सुन्दर पीताम्बर तन साजित।
चरण पादुका मुनि मन राजित॥

धनि शिवसुवन षडानन भ्राता।
गौरी ललन विश्व-विधाता॥

ऋद्धि सिद्धि तव चँवर डुलावे।
मूषक वाहन सोहत द्वारे॥

कहौ जन्म शुभ कथा तुम्हारी।
अति शुचि पावन मंगल कारी॥

एक समय गिरिराज कुमारी।
पुत्र हेतु तप कीन्हा भारी॥

भयो यज्ञ जब पूर्ण अनूपा।
तब पहुंच्यो तुम धरि द्विज रूपा।

अतिथि जानि कै गौरी सुखारी।
बहु विधि सेवा करी तुम्हारी॥

अति प्रसन्न ह्वै तुम वर दीन्हा।
मातु पुत्र हित जो तप कीन्हा॥

मिलहि पुत्र तुहि बुद्धि विशाला।
बिना गर्भ धारण यहि काला॥

गणनायक गुण ज्ञान निधाना।
पूजित प्रथम रूप भगवाना॥

अस कहि अन्तर्धान रूप ह्वै।
पलना पर बालक स्वरूप ह्वै॥

बनि शिशु रुदन जबहि तुम ठाना।
लखि मुख सुख नहिं गौरि समाना॥

सकल मगन सुख मंगल गावहिं।
नभ ते सुरन सुमन वर्षावहिं॥

शम्भु उमा बहुदान लुटावहिं।
सुर मुनि जन सुत देखन आवहिं॥

लखि अति आनन्द मंगल साजा।
देखन भी आए शनि राजा॥

निज अवगुण गुनि शनि मन माहीं।
बालक देखन चाहत नाहीं॥

गिरजा कछु मन भेद बढ़ायो।
उत्सव मोर न शनि तुहि भायो॥

कहन लगे शनि मन सकुचाई।
का करिहौ शिशु मोहि दिखाई॥

नहिं विश्वास उमा कर भयऊ।
शनि सों बालक देखन कह्यऊ॥

पड़तहिं शनि दृग कोण प्रकाशा।
बालक शिर उड़ि गयो आकाशा॥

गिरजा गिरीं विकल ह्वै धरणी।
सो दुख दशा गयो नहिं वरणी॥

हाहाकार मच्यो कैलाशा।
शनि कीन्ह्यों लखि सुत को नाशा॥

तुरत गरुड़ चढ़ि विष्णु सिधाए।
काटि चक्र सो गज शिर लाए॥

बालक के धड़ ऊपर धारयो।
प्राण मन्त्र पढ़ शंकर डारयो॥

नाम गणेश शम्भु तब कीन्हे।
प्रथम पूज्य बुद्धि निधि वर दीन्हे॥

बुद्धि परीक्षा जब शिव कीन्हा।
पृथ्वी की प्रदक्षिणा लीन्हा॥

चले षडानन भरमि भुलाई।
रची बैठ तुम बुद्धि उपाई॥

चरण मातु-पितु के धर लीन्हें।
तिनके सात प्रदक्षिण कीन्हें॥

धनि गणेश कहि शिव हिय हरषे।
नभ ते सुरन सुमन बहु बरसे॥

तुम्हरी महिमा बुद्धि बड़ाई।
शेष सहस मुख सकै न गाई॥

मैं मति हीन मलीन दुखारी।
करहुँ कौन बिधि विनय तुम्हारी॥

भजत रामसुन्दर प्रभुदासा।
लख प्रयाग ककरा दुर्वासा॥

अब प्रभु दया दीन पर कीजै।
अपनी शक्ति भक्ति कुछ दीजै॥

दोहा
श्री गणेश यह चालीसा पाठ करें धर ध्यान।
नित नव मंगल गृह बसै लहे जगत सन्मान॥

सम्वत् अपन सहस्र दश ऋषि पंचमी दिनेश।
पूरण चालीसा भयो मंगल मूर्ति गणेश॥

Shri Ganesh Chalisa Lyrics in English

॥ Doha ॥

Jai Ganpati sadgun sadan, kavivar badan kripaal।
Vighna haran mangal karan, jai jai Girija-laal॥

॥ Chaupai ॥

Jai jai jai Ganpati Raju,
Mangal bharan karan shubh kaaju॥

Jai Gajabadan sadan sukhdata,
Vishwa Vinayak buddhi vidhata॥

Vakra tund shuchi shund suhaavan,
Tilak tripund bhaal man bhaavan॥

Raajit mani muktan ur maala,
Swarn mukut shir nayan vishala॥

Pustak paani kuthaar trishoolam,
Modak bhog sugandhit phoolam॥

Sundar peetaambar tan saajit,
Charan paaduka muni man raajit॥

Dhanya Shiva-suvan Shadanand bhraata,
Gauri lalan vishwa-vidhaata॥

Riddhi Siddhi tav chavar dulaave,
Mooshak vaahan sohat dwaare॥

Kahoon janam shubh katha tumhaari,
Ati shuchi paavan mangal kaari॥

Ek samay Giriraaj kumaari,
Putra hetu tap keenha bhaari॥

Bhayo yagya jab poorn anoopa,
Tab pahunche tum dhari dvij roopa॥

Atithi jaani Gauri sukhaari,
Bahu vidhi seva kari tumhaari॥

Ati prasann hvai tum var deenha,
Maatu-putra hit jo tap keenha॥

Milahi putra tuhi buddhi vishaala,
Bina garbh dhaaran yahi kaala॥

Gananayak gun gyaan nidhaana,
Poojit pratham roop Bhagwaana॥

As kahi antardhaan roop hvai,
Palna par baalak swaroop hvai॥

Bani shishu rudan jabahi tum thaana,
Lakhi mukh sukh nahin Gauri samaana॥

Sakal magan sukh mangal gaavahin,
Nabh te suran suman varshaavahin॥

Shambhu Uma bahudaan lutaavahin,
Sur muni jan sut dekhan aavahin॥

Lakhi ati aanand mangal saaja,
Dekhan bhi aaye Shani raaja॥

Nij avgun guni Shani man maahin,
Baalak dekhan chaahat naahin॥

Girja kachhu man bhed badhaayo,
Utsav mor na Shani tuhi bhaayo॥

Kahan lage Shani man sakuchaai,
Ka karihau shishu mohi dikhaai॥

Nahin vishvaas Uma kar bhayau,
Shani son baalak dekhan kahyau॥

Padtahin Shani drig kon prakaasha,
Baalak shir udi gayo aakaasha॥

Girja giri vikhal hvai dharani,
So dukh dasha gayo nahin varni॥

Haahaakaar machyo Kailaasha,
Shani keenhyon lakhi sut ko naasha॥

Turat Garud chadhi Vishnu sidhaaye,
Kaati chakra so gaj shir laaye॥

Baalak ke dhad upar dhaaryo,
Praan mantra padh Shankar daaryo॥

Naam Ganesh Shambhu tab keenhe,
Pratham poojya buddhi nidhi var deenhe॥

Buddhi pareeksha jab Shiv keenha,
Prithvi ki pradakshina leenha॥

Chale Shadanand bharami bhulaai,
Rachi baith tum buddhi upaai॥

Charan maatu-pitu ke dhar leenhen,
Tinke saath pradakshina keenhen॥

Dhanya Ganesh kahi Shiv hiya harshay,
Nabh te suran suman bahu barsay॥

Tumhri mahima buddhi badhaai,
Shesh sahas mukh sakai na gaai॥

Main mati-heen maleen dukhaari,
Karun kaun vidhi vinay tumhaari॥

Bhajat Raam-Sundar Prabhudaasa,
Lakh Prayaag Kakra Durvaasa॥

Ab Prabhu daya deen par keeje,
Apni shakti bhakti kuchh deeje॥

॥ Doha ॥

Shri Ganesh yeh chalisaa paath kare dhar dhyaan।
Nit nav mangal grih base, lahe jagat sammaan॥

Samvat apn sahasra dash, Rishi Panchami dinesh।
Pooran chalisaa bhayo, Mangal-moorti Ganesh॥

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श्री गणेश चालीसा पढ़ने के चमत्कारिक लाभ

भगवान गणेश को प्रथम पूज्य और विघ्नहर्ता माना जाता है। बुधवार के दिन या किसी भी शुभ कार्य से पहले गणेश चालीसा का पाठ करने से जीवन में अद्भुत सकारात्मक बदलाव आते हैं:

  • विघ्नों का नाश: गणेश जी का एक नाम ‘विघ्नहर्ता’ है। चालीसा का पाठ करने से जीवन में आने वाली सभी बाधाएं और रुकावटें (Obstacles) अपने आप दूर हो जाती हैं।
  • बुद्धि और विद्या की प्राप्ति: जो विद्यार्थी (Students) परीक्षा में अच्छे परिणाम चाहते हैं या अपनी स्मरण शक्ति बढ़ाना चाहते हैं, उन्हें नित्य गणेश चालीसा का पाठ करना चाहिए।
  • ऋद्धि-सिद्धि का वास: गणेश जी के साथ शुभ-लाभ और ऋद्धि-सिद्धि चलती हैं। इस पाठ से घर में धन-धान्य की कमी नहीं होती और बरकत बनी रहती है।
  • नया कार्य सफल होना: यदि आप कोई नया व्यापार, नौकरी या गृह प्रवेश करने जा रहे हैं, तो चालीसा पढ़कर शुरुआत करने से कार्य निर्विघ्न संपन्न होता है।
  • शनि और ग्रह दोष शांति: गणेश चालीसा में वर्णन आता है कि गणेश जी ने शनि देव की दृष्टि से हुए अनिष्ट को भी संभाला था। इसका पाठ करने से ग्रह दोष शांत होते हैं।

विशेष उपाय: बुधवार के दिन गणेश जी को दूर्वा (घास) और मोदक का भोग लगाकर चालीसा पढ़ने से मनोकामना बहुत शीघ्र पूर्ण होती है।

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