Ganesh Aarti Lyrics in Hindi and English । जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा

गणपति बप्पा मोरया! हिन्दू धर्म में कोई भी शुभ कार्य, पूजा या अनुष्ठान ‘श्री गणेश’ की आराधना के बिना अधूरा माना जाता है। और जब गणेश जी को मनाने की बात आती है, तो सबसे पहले जुबां पर एक ही आरती आती है, “जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा, माता जाकी पार्वती पिता महादेवा।”

यह आरती न केवल अत्यंत मधुर है, बल्कि इसमें भगवान गणेश के स्वरुप, उनके परिवार और उनकी महिमा का अद्भुत वर्णन है। चाहे दीवाली हो, गणेश चतुर्थी हो या घर में नित्य पूजा, इस आरती के बिना पूजा संपन्न नहीं होती।

अक्सर आरती गाते समय हम कुछ पंक्तियां भूल जाते हैं या उनके शब्दों में त्रुटि कर देते हैं। इसलिए, iLoveBhajan पर हम आपके लिए इस प्रसिद्ध गणेश आरती के प्रामाणिक लिरिक्स हिंदी (Hindi) और इंग्लिश (English) में लेकर आए हैं।

आइये, रिद्धि-सिद्धि के दाता श्री गणेश जी का आह्वान करें और प्रेम से यह आरती गाएं।

जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी।
माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी ॥

जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

पान चढ़े, फूल चढ़े और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा ॥

जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

अंधन को आँख देत, कोढ़िन को काया।
बाँझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ॥

जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

सूर श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

Jai Ganesh Deva – Hinglish Aarti

Jai Ganesh, Jai Ganesh, Jai Ganesh Deva
Mata jaaki Parvati, pita Mahadeva

Jai Ganesh, Jai Ganesh, Jai Ganesh Deva
Mata jaaki Parvati, pita Mahadeva

Ek dant dayavant, chaar bhuja dhaari
Maathe sindoor sohe, moose ki sawaari

Jai Ganesh, Jai Ganesh, Jai Ganesh Deva
Mata jaaki Parvati, pita Mahadeva

Paan chadhe, phool chadhe aur chadhe meva
Ladduan ka bhog lage, sant karein seva

Jai Ganesh, Jai Ganesh, Jai Ganesh Deva
Mata jaaki Parvati, pita Mahadeva

Andhan ko aankh det, kodhin ko kaaya
Baanjhan ko putra det, nirdhan ko maaya

Jai Ganesh, Jai Ganesh, Jai Ganesh Deva
Mata jaaki Parvati, pita Mahadeva

Soor Shyam sharan aaye, safal keeje seva
Mata jaaki Parvati, pita Mahadeva

Jai Ganesh, Jai Ganesh, Jai Ganesh Deva
Mata jaaki Parvati, pita Mahadeva

श्री गणेश आरती पढ़ने के चमत्कारिक लाभ

गणेश जी ‘प्रथम पूज्य’ और ‘विघ्नहर्ता’ हैं। सदियों से भक्त इस आरती को गाते आ रहे हैं और इसके प्रभाव अचूक माने जाते हैं। आरती की पंक्तियों में ही इसके लाभ छिपे हुए हैं:

  • शारीरिक कष्टों से मुक्ति: आरती में कहा गया है, “अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया”। इसका अर्थ है कि गणेश जी की कृपा से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं दूर होती हैं और रोगी को निरोगी काया मिलती है।
  • संतान सुख: जो दंपत्ति संतान सुख से वंचित हैं, उनके लिए यह आरती वरदान है, “बांझन को पुत्र देत”। श्रद्धा से आरती गाने से सूनी गोद भर जाती है।
  • धन और समृद्धि: “निर्धन को माया”, गणेश जी रिद्धि-सिद्धि के स्वामी हैं। जो भक्त आर्थिक तंगी से गुजर रहे हैं, वे यदि नित्य यह आरती गाएं तो घर में धन-धान्य की वर्षा होने लगती है।
  • सभी मनोकामनाएं पूर्ण: “सूरश्याम शरण आए, सफल कीजै सेवा”। जो भी भक्त सच्ची श्रद्धा से गणेश जी की शरण में आता है, उसकी सभी अधूरी मनोकामनाएं और कार्य सिद्ध हो जाते हैं।
  • विघ्नों का नाश: किसी भी शुभ कार्य से पहले यह आरती गाने से उस कार्य में आने वाली सारी बाधाएं गणेश जी पहले ही हर लेते हैं।

विशेष टिप: गणेश जी को लड्डू या मोदक बहुत प्रिय हैं। आरती करते समय यदि उन्हें भोग लगाया जाए, तो वे बहुत शीघ्र प्रसन्न होते हैं।

गणेश जी की आरती का अर्थ

जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

हे गणेश जी! आपकी जय हो। आप माता पार्वती और भगवान महादेव (शिवजी) के पुत्र हैं।

एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी।
माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी ॥

आप एकदंती हैं (एक दाँत वाले), दयालु हैं, आपकी चार भुजाएँ हैं। आपके मस्तक पर सिंदूर शोभित है और आपकी सवारी मूषक (चूहा) है।

पान चढ़े, फूल चढ़े और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा ॥

भक्त आपको पान, फूल, मेवा चढ़ाते हैं और आपके प्रिय लड्डू का भोग लगाया जाता है। संतजन आपकी भक्ति और सेवा करते हैं।

अंधन को आँख देत, कोढ़िन को काया।
बाँझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ॥

आप अंधों को आँखें देते हैं, कोढ़ (कुष्ठ) रोगियों को स्वस्थ शरीर प्रदान करते हैं। निःसंतान को संतान का सुख और निर्धनों को धन-संपत्ति देते हैं।

सूर श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

सूरदास (कवि) और सभी भक्त आपकी शरण में आते हैं। हे गणेश जी! उनकी सेवा सफल कीजिए। आप माता पार्वती और महादेव के पुत्र हैं।

सारांश

इस आरती में भगवान गणेश जी की स्तुति की गई है। वे करुणामय, दयालु और भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण करने वाले हैं। उनके पूजन और आरती से जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और संतोष मिलता है।

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