॥ ॐ हं हनुमते नमः ॥ 🙏 क्या आपके जीवन में कोई ऐसा संकट है जो टलने का नाम नहीं ले रहा? क्या आप किसी अज्ञात भय, शत्रु बाधा या ऊपरी हवा (Negative Energy) से परेशान हैं?
जब सारे रास्ते बंद हो जाएं, तब “बजरंग बाण” (Bajrang Baan) का संधान किया जाता है। जैसा कि नाम से स्पष्ट है ‘बाण’ (Arrow)। जिस तरह राम जी का बाण कभी खाली नहीं जाता, वैसे ही हनुमान जी का यह पाठ अचूक है।
हनुमान चालीसा और बजरंग बाण में अंतर: हनुमान चालीसा में हम विनती करते हैं, लेकिन बजरंग बाण में हम हनुमान जी को ‘श्री राम की सौगंध’ (Shapath) देकर उन्हें कार्य करने के लिए बाध्य करते हैं। इसमें “इन्हें मारु, तोहि सपथ राम की” जैसी पंक्तियां हैं, जो इसे अत्यंत प्रभावशाली बनाती हैं।
इस पोस्ट में आपको मिलेगा: इंटरनेट पर कई जगह बजरंग बाण के पाठ में त्रुटियां हैं। यहाँ Rakesh Joshi द्वारा सत्यापित शुद्ध पाठ दिया गया है:
- Bajrang Baan Lyrics in Hindi: दोहा और चौपाई के सही क्रम में।
- Hinglish Lyrics: जिन्हें हिंदी पढ़ने में कठिनाई हो।
- पाठ की विधि: “ॐ हनु हनु हनु…” बीज मंत्रों का सही उच्चारण।
| जानकारी (Details) | विवरण (Description) |
| पाठ का नाम | श्री बजरंग बाण (Bajrang Baan) |
| देवता | भगवान हनुमान |
| मुख्य पंक्ति | निश्चय प्रेम प्रतीति ते… |
| विशेषता | भूत-प्रेत व शत्रु नाशक |
| रचयिता | गोस्वामी तुलसीदास (परंपरागत) |
| शुभ दिन | मंगलवार और शनिवार |
आइए, पूर्ण पवित्रता और दृढ़ विश्वास के साथ संकटमोचन का यह अमोघ पाठ आरम्भ करें।
Bajrang Baan lyrics in Hindi
॥ दोहा ॥
निश्चय प्रेम प्रतीति ते, बिनय करैं सनमान।
तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करैं हनुमान॥
॥ चौपाई ॥
जय हनुमंत संत हितकारी। सुन लीजै प्रभु अरज हमारी॥
जन के काज बिलंब न कीजै। आतुर दौरि महा सुख दीजै॥
जैसे कूदि सिंधु महिपारा। सुरसा बदन पैठि बिस्तारा॥
आगे जाय लंकिनी रोका। मारेहु लात गई सुरलोका॥
जाय बिभीषन को सुख दीन्हा। सीता निरखि परमपद लीन्हा॥
बाग उजारि सिंधु महँ बोरा। अति आतुर जमकातर तोरा॥
अक्षय कुमार मारि संहारा। लूम लपेटि लंक को जारा॥
लाह समान लंक जरि गई। जय जय धुनि सुरपुर नभ भई॥
अब बिलंब केहि कारन स्वामी। कृपा करहु उर अंतरयामी॥
जय जय लखन प्रान के दाता। आतुर ह्वै दुख करहु निपाता॥
जै हनुमान जयति बल-सागर। सुर-समूह-समरथ भट-नागर॥
ॐ हनु हनु हनु हनुमंत हठीले। बैरिहि मारु बज्र की कीले॥
ॐ ह्नीं ह्नीं ह्नीं हनुमंत कपीसा। ॐ हुं हुं हुं हनु अरि उर सीसा॥
जय अंजनि कुमार बलवंता। शंकरसुवन बीर हनुमंता॥
बदन कराल काल-कुल-घालक। राम सहाय सदा प्रतिपालक॥
भूत, प्रेत, पिसाच निसाचर। अगिन बेताल काल मारी मर॥
इन्हें मारु, तोहि सपथ राम की। राखु नाथ मरजाद नाम की॥
सत्य होहु हरि सपथ पाइ कै। राम दूत धरु मारु धाइ कै॥
जय जय जय हनुमंत अगाधा। दुख पावत जन केहि अपराधा॥
पूजा जप तप नेम अचारा। नहिं जानत कछु दास तुम्हारा॥
बन उपबन मग गिरि गृह माहीं। तुम्हरे बल हौं डरपत नाहीं॥
जनकसुता हरि दास कहावौ। ताकी सपथ बिलंब न लावौ॥
जै जै जै धुनि होत अकासा। सुमिरत होय दुसह दुख नासा॥
चरन पकरि, कर जोरि मनावौं। यहि औसर अब केहि गोहरावौं॥
उठु, उठु, चलु, तोहि राम दुहाई। पायँ परौं, कर जोरि मनाई॥
ॐ चं चं चं चं चपल चलंता। ॐ हनु हनु हनु हनु हनुमंता॥
ॐ हं हं हाँक देत कपि चंचल। ॐ सं सं सहमि पराने खल-दल॥
अपने जन को तुरत उबारौ। सुमिरत होय आनंद हमारौ॥
यह बजरंग-बाण जेहि मारै। ताहि कहौ फिरि कवन उबारै॥
पाठ करै बजरंग-बाण की। हनुमत रक्षा करै प्रान की॥
यह बजरंग बाण जो जापैं। तासों भूत-प्रेत सब कापैं॥
धूप देय जो जपै हमेसा। ताके तन नहिं रहै कलेसा॥
॥ दोहा ॥
उर प्रतीति दृढ़, सरन ह्वै, पाठ करै धरि ध्यान।
बाधा सब हर, करैं सब काम सफल हनुमान॥
Bajrang Baan Lyrics in English (Hinglish)
॥ Doha ॥
Nishchay Prem Pratiti Te, Binay Karain Sanman.
Tehi Ke Kaaraj Sakal Shubh, Siddh Karain Hanuman.
॥ Chaupai ॥
Jai Hanumant Sant Hitkaari. Sun Leejay Prabhu Araj Hamari.
Jan Ke Kaaj Vilamb Na Keejay. Aatur Dauri Maha Sukh Deejay.
Jaise Koodi Sindhu Mahipaara. Sursa Badan Paithi Vistaara.
Aage Jaay Lankini Roka. Marehu Laat Gayi Surloka.
Jaay Vibhishan Ko Sukh Deenha. Sita Nirakhi Parampad Leenha.
Baag Ujaari Sindhu Mahan Bora. Ati Aatur Jamkaatar Tora.
Akshay Kumar Maari Sanhaara. Loom Lapeti Lank Ko Jaara.
Laah Samaan Lank Jari Gayi. Jai Jai Dhuni Surpur Nabh Bhayi.
Ab Vilamb Kehi Kaaran Swami. Kripa Karahu Ur Antaryaami.
Jai Jai Lakhan Praan Ke Daata. Aatur Hvai Dukh Karahu Nipaata.
Jai Hanuman Jayati Bal-Saagar. Sur-Samooh-Samrath Bhat-Naagar.
Om Hanu Hanu Hanu Hanumant Hathile. Bairihi Maaru Bajra Ki Keele.
Om Hneen Hneen Hneen Hanumant Kapisa. Om Hun Hun Hun Hanu Ari Ur Seesa.
Jai Anjani Kumar Balwanta. Shankar Suvan Veer Hanumanta.
Badan Karaal Kaal-Kul-Ghaalak. Ram Sahay Sada Pratipaalak.
Bhoot, Pret, Pishach Nisachar. Agin Betaal Kaal Maari Mar.
Inhein Maaru, Tohi Shapath Ram Ki. Rakhu Nath Marjaad Naam Ki.
Satya Hohu Hari Shapath Paay Kai. Ram Doot Dharu Maaru Dhaay Kai.
Jai Jai Jai Hanumant Agaadha. Dukh Paavat Jan Kehi Apraadha.
Pooja Jap Tap Nem Achaara. Nahin Jaanat Kachhu Das Tumhara.
Ban Upban Mag Giri Grih Maahin. Tumhre Bal Haun Darpat Naahin.
Janaksuta Hari Das Kahau. Taaki Shapath Vilamb Na Laau.
Jai Jai Jai Dhuni Hot Akaasa. Sumirat Hoy Dusah Dukh Naasa.
Charan Pakari, Kar Jori Manaavon. Yahi Avasar Ab Kehi Goharaavon.
Uthu, Uthu, Chalu, Tohi Ram Duhaai. Paayau Paraun, Kar Jori Manaai.
Om Cham Cham Cham Cham Chapal Chalanta. Om Hanu Hanu Hanu Hanu Hanumanta.
Om Ham Ham Haank Det Kapi Chanchal. Om San San Sahami
Paraane Khal-Dal. Apne Jan Ko Turat Ubaarau. Sumirat Hoy Anand Hamarau.
Yah Bajrang-Baan Jehi Maarai. Taahi Kahau Phiri Kavan Ubaarai.
Paath Karai Bajrang-Baan Ki. Hanumat Raksha Karai Praan Ki.
Yah Bajrang Baan Jo Jaapai. Taason Bhoot-Pret Sab Kaapai.
Dhoop Dey Jo Japai Hamesa. Taake Tan Nahin Rahai Kalesa.
॥ Doha ॥
Ur Pratiti Dridh, Saran Hvai, Paath Karai Dhari Dhyan.
Baadha Sab Har, Karain Sab Kaam Safal Hanuman.
महत्वपूर्ण नियम
इस पाठ का पूर्ण फल तभी मिलता है जब आप इसके नियमों का पालन करें:
- शुद्धता: बजरंग बाण का पाठ करते समय पवित्रता (तन और मन की) अनिवार्य है। मांसाहार या मदिरा सेवन करने वाले को यह पाठ नहीं करना चाहिए।
- शपथ का महत्व: इसमें आप प्रभु को “राम की शपथ” देते हैं, इसलिए इसका प्रयोग केवल गंभीर संकट (जैसे बीमारी, शत्रु भय, या तंत्र बाधा) में ही करें।
- दीपक: पाठ करते समय चमेली के तेल या घी का दीपक जलाना शुभ होता है।
Note: यदि आप सामान्य शांति के लिए पाठ करना चाहते हैं, तो हनुमान चालीसा (Hanuman Chalisa) का पाठ प्रतिदिन करें। बजरंग बाण का प्रयोग “ब्रह्मास्त्र” की तरह विशेष परिस्थितियों में ही करें।
निष्कर्ष: बजरंग बाण – संकटों का एकमात्र निवारण
“बजरंग बाण” केवल शब्दों का समूह नहीं, बल्कि एक महामंत्र है। जब जीवन में चारों तरफ अँधेरा छा जाए, शत्रु हावी होने लगें, या कोई अनजान भय सताने लगे, तो इसका पाठ ‘रामबाण’ की तरह काम करता है।
गोस्वामी तुलसीदास जी ने इसकी रचना उन भक्तों के लिए की थी जो अपनी रक्षा करने में असमर्थ हैं। जब हम पाठ में कहते हैं “इन्हें मारु, तोहि सपथ राम की”, तो हनुमान जी अपने प्रभु श्री राम की सौगंध सुनकर तुरंत भक्त की रक्षा के लिए दौड़ पड़ते हैं।
एक जरूरी सलाह: चूंकि यह एक तांत्रिक और उग्र पाठ माना जाता है, इसलिए इसका प्रयोग छोटी-मोटी समस्याओं के लिए न करें। इसका प्रयोग तभी करें जब संकट बहुत बड़ा हो। पाठ करते समय पवित्रता (सात्विकता) और ब्रह्मचर्य का पालन अनिवार्य है।

