Aarti Kunj Bihari Ki Lyrics – आरती कुंज बिहारी की

॥ राधे-राधे! ॥ 🦚

वृंदावन की गलियों में गूंजने वाली और हर कृष्ण भक्त के हृदय में बसने वाली, अगर कोई एक आरती है, तो वह है “आरती कुंज बिहारी की” (Aarti Kunj Bihari Ki)।

यह केवल एक आरती नहीं, बल्कि भगवान श्री कृष्ण के ‘शृंगार’ का एक सुंदर वर्णन है। इसमें बताया गया है कि कैसे उनके गले में वैजयंती माला है, सिर पर मोर मुकुट है और कानों में कुंडल चमक रहे हैं।

जब हम गाते हैं— “गगन सम अंग कांति काली” (जिनका शरीर आकाश की तरह नीला-सांवला है), तो आँखों के सामने बांके बिहारी जी की मनमोहक छवि आ जाती है। चाहे जन्माष्टमी हो या शाम की नित्य पूजा, इस आरती के बिना सब अधूरा लगता है।

आइए, प्रभु के इस दिव्य रूप का ध्यान करें और प्रेम से आरती गाएं।

जानकारी (Details)विवरण (Description)
आरती का नामआरती कुंज बिहारी की (Aarti Kunj Bihari Ki)
देवताश्री कृष्ण (बांके बिहारी)
मुख्य स्थानवृंदावन (Vrindavan)
विशेष अवसरजन्माष्टमी, एकादशी, नित्य पूजा
मुख्य वाद्यमृदंग, मंजीरा और शंख
भावसौंदर्य वर्णन और भक्ति (Beauty & Devotion)

आरती कुंज बिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की
गले में बैजंती माला, बजावै मुरली मधुर बाला।

श्रवण में कुण्डल झलकाला, नंद के आनंद नंदलाला।
आरती कुंज बिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥

गगन सम अंग कांति काली, राधिका चमक रही आली।
लतन में ठाढ़े बनमाली; भ्रमर सी अलक, कस्तूरी तिलक, चंद्र सी झलक,
ललित छवि श्यामा प्यारी की, श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की।
आरती कुंज बिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥

कनकमय मोर मुकुट बिलसै, देवता दरसन को तरसैं।
गगन सों सुमन रासि बरसै; बजे मुरचंग, मधुर मिरदंग, ग्वालिन संग;
अतुल रति गोप कुमारी की॥ श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥
आरती कुंज बिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥

जहां ते प्रकट भई गंगा, कलुष कलि हारिणि श्रीगंगा।
स्मरन ते होत मोह भंगा; बसी सिव सीस, जटा के बीच, हरै अघ कीच;
चरन छवि श्रीबनवारी की॥ श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥
आरती कुंज बिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥

चमकती उज्ज्वल तट रेनू, बज रही वृंदावन बेनू।
चहुं दिसि गोपि ग्वाल धेनू; हंसत मृदु मंद,चांदनी चंद, कटत भव फंद।।
टेर सुन दीन भिखारी की॥ श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥

आरती कुंज बिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥
आरती कुंज बिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥
आरती कुंज बिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥

Aarti Kunj Bihari ki,
Shri Giridhar Krishna Murari ki

Gale mein baijanti mala,
Bajavai murli madhur baala

Shravan mein kundal jhalkaala,
Nand ke aanand Nandlaala
Aarti Kunj Bihari ki,
Shri Giridhar Krishna Murari ki

Gagan sam ang kaanti kaali,
Radhika chamak rahi aali
Latan mein thaade banmaali,
Bhramar si alak, kasturi tilak, chandra si jhalak
Lalit Chhavi Shyama pyaari ki,
Shri Giridhar Krishna Murari ki
Aarti Kunj Bihari ki,
Shri Giridhar Krishna Murari ki

Kanakmay mor mukut bilasai,
Devta darshan ko tarsai
Gagan son Suman Raas Barasai,
Baje murchang, madhur mridang, gopiyan sang
Atul rati gop kumaari ki,
Shri Giridhar Krishna Murari ki
Aarti Kunj Bihari ki,
Shri Giridhar Krishna Murari ki

Jahaan te prakat bhayi Ganga,
Kalush kali haarini Shri Ganga
Smaran te hot moh bhanga,
Basi Shiv sees, jata ke beech, harai agh keech
Charan Chhavi Shri Banwaari ki,
Shri Giridhar Krishna Murari ki
Aarti Kunj Bihari ki,
Shri Giridhar Krishna Murari ki

Chamakti ujjwal tat renu,
Baj rahi Vrindavan venu
Chahun disi gopi gwaal dhenu,
Hansat mridu mand, chaandni chandra, katat bhav band
Ter sun deen bhikhaari ki,
Shri Giridhar Krishna Murari ki

Aarti Kunj Bihari ki,
Shri Giridhar Krishna Murari ki

यह आरती भगवान कृष्ण के ‘माधुर्य भाव’ (प्रेम और मिठास) से भरी है। इसे पढ़ने से मन को असीम शीतलता मिलती है।

कुंज बिहारी आरती पढ़ने के चमत्कारिक लाभ

भगवान श्री कृष्ण आनंद के सागर हैं। ‘आरती कुंज बिहारी की’ गाने से न केवल मन प्रसन्न होता है, बल्कि जीवन में कई सकारात्मक बदलाव आते हैं:

  • मानसिक तनाव और चिंता से मुक्ति: आरती में जिक्र है “बजावै मुरली मधुर बाला”। भगवान की बांसुरी की धुन का ध्यान करते हुए यह आरती गाने से डिप्रेशन, तनाव और मानसिक अशांति तुरंत दूर हो जाती है।
  • संकटों से रक्षा: हम उन्हें ‘गिरधर’ (पर्वत उठाने वाला) कहते हैं। जिस तरह उन्होंने गोवर्धन पर्वत उठाकर ब्रजवासियों की रक्षा की थी, वैसे ही इस आरती का पाठ करने वाले भक्त के जीवन के सारे बोझ और संकट कन्हैया अपने ऊपर ले लेते हैं।
  • पापों का नाश: आरती की पंक्ति है “जगत के दूख द्वंद भंजन”। इसका अर्थ है कि श्री कृष्ण संसार के सभी दुखों और पापों को नष्ट करने वाले हैं। नित्य आरती करने से आत्मा शुद्ध होती है।
  • प्रेम और भक्ति की वृद्धि: यह आरती हृदय में भक्ति रस भर देती है। इसे गाने से ईश्वर के प्रति प्रेम बढ़ता है और मनुष्य का स्वभाव सरल और मधुर हो जाता है।
  • सौंदर्य और आकर्षण: माना जाता है कि कृष्ण जी के रूप का वर्णन करने वाली इस आरती को गाने से भक्त के व्यक्तित्व (Personality) में भी आकर्षण और तेज आता है।

विशेष उपाय: भगवान श्री कृष्ण को तुलसी दल (Tulsi Leaves) और माखन-मिश्री अत्यंत प्रिय है। आरती करते समय भोग में तुलसी जरूर शामिल करें, इससे पूजा का फल तुरंत मिलता है।

भावार्थ

इस आरती में श्री कृष्ण के रूप का बहुत ही सुंदर वर्णन है:

  1. कुंज बिहारी (Kunj Bihari): वृंदावन के बगीचों (कुंज) में विहार करने (घूमने) वाले।
  2. बैजंती माला (Baijanti Mala): यह 5 रत्नों या बीजों से बनी माला होती है, जो भगवान विष्णु और कृष्ण को अत्यंत प्रिय है।
  3. भ्रमर सी अलक (Bhramar Si Alak): उनके बाल (लटें) भंवरे की तरह काले और घुंघराले हैं।
  4. मुरचंग और मृदंग: ये प्राचीन वाद्य यंत्र (Musical Instruments) हैं जो कृष्ण की लीलाओं में बजते थे।
  5. जहां ते प्रकट भई गंगा: यहाँ बताया गया है कि गंगा जी भगवान विष्णु (कृष्ण) के चरणों से निकली हैं और शिव जी की जटाओं में बसी हैं।

Conclusion (निष्कर्ष)

“आरती कुंज बिहारी की” गाने से मन में शीतलता और आनंद का संचार होता है। यह आरती हमें याद दिलाती है कि भगवान श्री कृष्ण केवल एक देवता नहीं, बल्कि प्रेम के सागर हैं।

चाहे आप किसी मंदिर में हों या अपने घर के पूजा कक्ष में, इस आरती को पूरे भाव और तालियां बजाकर गाएं, बांके बिहारी जी आपकी हर मनोकामना पूर्ण करेंगे।

🙏 जय श्री कृष्णा! 🙏 क्या आपको वृंदावन जाना पसंद है? कमेंट में “Radhe Radhe” लिखकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराएं!

⚠️ Disclaimer (अस्वीकरण):

All lyrics are property and copyright of their original owners. These are provided here for educational and devotional purposes only.

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